चंद्रवंशी समाज को लेकर मेयर प्रत्याशी अरुणा शंकर की चिंता कहीं चुनावी जुमला तो नहीं ?
Palamu : मेदिनीनगर नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी चरम पर है। इस चुनाव में खासकर मेयर पद के प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा दम-खम कम लग रहे हैं। ऐसे प्रत्याशियों की नजर हर जात, हर वर्ग और हर धर्म के लोगों पर है। उनकी चाहत है कि सभी का वोट सहजता से उन्हें उपलब्ध हो जाए। नियर पद के अधिकांश प्रत्याशियों की नजर निगम क्षेत्र के चंद्रवंशी समाज पर है। चंद्रवंशी समाज को अपने पालने में लाने के लिए मेयर प्रत्याशी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। बुधवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित मेयर प्रत्याशी पूनम सिंह ने जुगल किशोर चंद्रवंशी के आवास पर संवाददाता सम्मेलन का आयोजित किया। जुगल किशोर चंद्रवंशी के आवास पर प्रेस कांफ्रेंस करने का एक ही मकसद था चंद्रवंशी समाज को एकजुट करना। इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद यह चर्चा जोर-शोर से होने लगा कि क्या जुगल किशोर चंद्रवंशी समाज का ठेकेदार हैं ? खैर इस सवाल का जवाब निगम क्षेत्र का जनता देगी। इधर इसी दिन भारतीय भारतीय जनता पार्टी समर्थित मेयर प्रत्याशी अरुण शंकर ने चंद्रवंशी समाज को लेकर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया। इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उन्होंने चंद्रवंशी समाज को लेकर जो चिंता जाहिर की, वह काबिले गौर है।

अरुणा शंकर ने विज्ञप्ति के माध्यम से समाज के प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज मेदिनीनगर के लोकतंत्र पर नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों की विरासत और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व पर हमला हो रहा है। श्रीमती शंकर ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर क्यों एक सोची-समझी रणनीति के तहत चंद्रवंशी समाज के स्थापित और लड़ाकू नेतृत्व को मुख्यधारा से बाहर किया जा रहा है? उन्होंने कहा,आज जनता पूछ रही है कि प्रदीप अकेला जैसा जनप्रिय चेहरा चुनावी समर से दूर क्यों है?
विज्ञप्ति में कहा गया है कि वार्ड नंबर 23 की धड़कन धीरज राज की सक्रियता को किसने नजरअंदाज किया? कोमल कुमार अंकु और मुकेश राज चंद्रवंशी जैसे युवाओं के प्रेरणास्रोत नेताओं को मुख्यधारा से बाहर क्यों धकेला गया?” उन्होंने हमीदगंज के बीएन कॉलेज रोड पर वर्षों से बसे चंद्रवंशी परिवारों को उजाड़ने की कोशिशों और वार्ड 21 से अंजना देवी को चुनाव लड़ने से रोकने के प्रयासों को एक ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया।शहर के सन्नाटे को ‘तूफान की आहट’ बताते हुए प्रथम महापौर श्रीमती शंकर ने आगाह किया कि मेदिनीनगर फिर से उसी अराजकता और गुंडागर्दी के दलदल की ओर बढ़ रहा है, जिससे दशकों के संघर्ष के बाद मुक्ति मिली थी। उन्होंने कहा कि एक समाज की रीढ़ तोड़कर शहर पर फिर से ‘खौफ का शासन’ स्थापित करने की बिसात बिछाई जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र डराने वालों से नहीं, बल्कि निडर नागरिकों से चलता है। अगर आज हम मौन रहे, तो आने वाली पीढ़ी हमसे पूछेगी कि जब शहर को जनमत के बजाय खौफ से चलाया जा रहा था, तब हम कहाँ थे ?
चंद्रवंशी समाज के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराते हुए अरुणा शंकर ने कहा कि यह समाज महाराज ययाति के न्याय और महाराज जरासंध की वीरता का उत्तराधिकारी है। उन्होंने कहा, यह समाज मगध के विजेता हैं, समाज का इतिहास कायरता का नहीं बल्कि साम्राज्य निर्माण का रहा है। जिस समाज का इतिहास इतना तेजस्वी हो, वह चंद डराने-धमकाने वाले तत्वों के सामने कभी घुटने नहीं टेकेगा।” उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चुनाव केवल हार-जीत का नहीं, बल्कि मेदिनीनगर की गलियों को भयमुक्त रखने और अपनी अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है।
अरुणा शंकर ने लोगों से कहा कि अपने हक और जमीन के लिए जागें। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ‘समाज-नीति’ को प्राथमिकता दें।चुप्पी तोड़ें, क्योंकि आपकी खामोशी ही विरोधियों की ताकत बन रही है।
अरुणा शंकर द्वारा जारी किए गए इस विज्ञप्ति के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस विज्ञप्ति पर कई तरह की चर्चाएं हो रही है। एक चर्चा यह भी है कि चंद्रवंशी समाज को लेकर अरुणा शंकर ने जो चिंता जाहिर की है, वह कहीं चुनावी जुमला तो नहीं है ?




