नगर निकाय चुनाव 2026: हुसैनाबाद में बदले चुनावी समीकरण

Dr. Satendra Kumar Chandel

Husenabad : झारखंड में प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर प्रशासनिक तैयारियों ने गति पकड़ ली है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी किए जाने के साथ ही चुनावी प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। आरक्षण सूची के प्रकाशन के बाद राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है और संभावित प्रत्याशियों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।निर्वाचन आयोग द्वारा हुसैनाबाद नगर पंचायत के अध्यक्ष पद को अनुसूचित जाति (अन्य) के लिए आरक्षित किए जाने से ओबीसी वर्ग में मायूसी देखी जा रही है। इससे पहले यह अटकलें लगाई जा रही थी कि इस बार अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होगा, लेकिन आरक्षण रोस्टर जारी होते ही इन चर्चाओं पर विराम लग गया।

नगर पंचायत में कुल 23 हजार 85 मतदाता हैं, जिनमें 12 हजार 77 पुरुष और 11 हजार आठ महिला मतदाता शामिल हैं। नगर पंचायत क्षेत्र 16 वार्डों में विभक्त है, जिनमें से सात वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि नौ वार्डों में सामान्य श्रेणी के वार्ड पार्षद चुनाव लड़ सकेंगे। महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में वार्ड आरक्षित होने से इस बार उपाध्यक्ष के अप्रत्यक्ष चुनाव में भी महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

उल्लेखनीय है कि अधिसूचित क्षेत्र से नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद वर्ष 2008 में हुसैनाबाद में पहली बार चुनाव हुआ था। उस समय अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित था और उषा देवी नगर पंचायत की पहली अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। इसके बाद वर्ष 2013 और 2018 में हुए चुनावों में अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति (अन्य) के लिए आरक्षित रहा। वर्ष 2018 के चुनाव में दलीय आधार पर प्रत्याशी उतारे गए थे, जिसमें राजद से शशि कुमार, भाजपा से रामेश्वर राम और एनसीपी से उषा देवी प्रत्याशी थीं। उस चुनाव में शशि कुमार को जीत मिली थी।

इस बार भी अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति (अन्य) के लिए आरक्षित होने से चुनावी मैदान में पुराने चेहरों के साथ-साथ नए दावेदारों की चर्चा शुरू हो गई है। संभावित प्रत्याशियों में पूर्व अध्यक्ष उषा देवी, शशि कुमार, रामेश्वर राम उर्फ छठन जी, मुन्ना कुमार देव, अजय भारती, पवन चौधरी, जेके पासवान और बीरेंद्र राम सहित अन्य नाम शामिल हैं। इनमें शशि कुमार राजद से जुड़े बताए जा रहे हैं, जबकि रामेश्वर राम और जेके पासवान भाजपा से हैं। मुन्ना कुमार देव झामुमो से जुड़े हैं और अजय भारती बसपा के वरीय नेता माने जाते हैं। वहीं, कुछ संभावित प्रत्याशियों की वर्तमान राजनीतिक सक्रियता को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

हालांकि इस बार नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं कराए जा रहे हैं, इसके बावजूद विभिन्न दलों से जुड़े नेताओं की परोक्ष सक्रियता साफ दिखाई दे रही है। वार्ड स्तर पर भी कई नए चेहरे सामने आने की संभावना जताई जा रही है। आरक्षण रोस्टर के बाद आम जनता में भी चुनाव को लेकर उत्साह बढ़ा है और विकास, बुनियादी सुविधाओं तथा स्थानीय मुद्दों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि आरक्षण रोस्टर की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति की स्थिति न बने।

नगर निकाय चुनाव को शहरी स्थानीय निकायों को मजबूत करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर टिकी हुई हैं, जिसके बाद झारखंड में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।

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