पेसा कानून आदिवासी–मूलवासी अधिकारों की सुरक्षा का मजबूत आधार, हटाने की नहीं संशोधन की जरूरत : विधायक रामचंद्र सिंह

Rahul Kumar @ united palamu
Latehar : सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनिका विधायक रामचंद्र सिंह ने पेसा कानून को लेकर चल रहे विरोध और राजनीतिक बयानबाज़ी पर उन्होंने कहा कि झारखंड के इतिहास में यह एक साहसिक और दूरदर्शी फैसला है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेसा कानून को लागू किया। इससे पहले किसी भी सरकार ने आदिवासी और मूलवासी समाज के अधिकारों को इतनी मजबूती से जमीन पर उतारने का प्रयास नहीं किया।विधायक ने स्पष्ट कहा कि पेसा कानून किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण, आदिवासी और मूलवासी समाज के अधिकारों और सुरक्षा के लिए लाया गया है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर कानून को हटाने की मांग करना अनुचित है। यदि कहीं कोई त्रुटि है तो उसका समाधान संशोधन के माध्यम से होना चाहिए।

विरोध नहीं, संवाद और संशोधन से होगा पेसा कानून का बेहतर क्रियान्वयन : मनिका विधायक

रामचंद्र सिंह ने कहा कि पेसा कानून का मुख्य उद्देश्य ग्राम सभा को सशक्त बनाना है। इसके तहत गांव की जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदाय का अधिकार सुनिश्चित होता है। ग्राम सभा की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण नहीं हो सकता तथा खनन, वन उपज और विकास योजनाओं में स्थानीय भागीदारी तय होती है।उन्होंने सवाल उठाया कि पेसा कानून का विरोध करने वालों को ग्राम सभा के मजबूत होने से परेशानी क्यों है।विधायक ने भ्रामक प्रचार से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि यह कानून आदिवासी–मूलवासी समाज की सुरक्षा की गारंटी है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक बहस, जागरूकता और आवश्यक संशोधन के जरिए ही इस कानून का सफल क्रियान्वयन संभव है।

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