रेड़मा ठाकुरबाड़ी मंदिर के प्रांगण में भगवान श्री राम के लीलाओं का श्रद्धालु कर रहे हैं रसपान

Palamu : देवी चन्द्रकला जी की रामकथा के चौथे दिवस का प्रवचन भक्ति,भाव और आध्यात्मिक रस से ओत-प्रोत रहा। देवी चंद्रकला रेड़मा ठाकुरबाड़ी मंदिर के प्रांगण में आयोजित श्री राम चरित मानस नवाह परायण यज्ञ के 59 वें अधिवेशन में मानस प्रवचन में प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं,धनुष भंग से पूर्व के फुलवारी प्रसंग तथा भक्तों के प्रति भगवान के अपार स्नेह का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया।
देवीजी ने कहा कि भगवान शिव और काकभुशुंडि जी दोनों के इष्ट बाल-राम हैं क्योंकि बालरूप में भगवान की सरलता,निष्कपटता और करुणा सहज ही हृदय को स्पर्श करती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्ची साधना बाहरी आडंबर में नहीं बल्कि अपने हृदय में भगवान का जीवंत चित्र स्थापित करने में है।

सीता-राम के प्रथम मिलन से पूर्व के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए देवीजी ने कहा कि जीवन के वास्तविक सुख राघव जी की कृपा से प्राप्त होते हैं, जबकि दुःख हमारे अपने कर्मों का फल होता है।उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि कथा को केवल सुनें नहीं बल्कि उसके भावों को अपने जीवन में उतारें और अंतर्मन में बसाएं।

प्रवचन से पूर्व सामाजिक कार्यकर्ता नवीन तिवारी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती संगीता तिवारी,रेड़मा के वरिष्ठ समाजसेवी उमेश तिवारी तथा संदीप विश्वकर्मा ने सपत्नीक आरती कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

इस अवसर पर श्री रामचरितमानस यज्ञ समिति के संरक्षक विजय तिवारी,अजय तिवारी,अध्यक्ष रिंकू तिवारी, कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तिवारी,मंत्री पिंकू तिवारी, कुणाल शांति प्रिय सहित अनेक पदाधिकारी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन अधिवक्ता यशवंत तिवारी ने किया।

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