सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आचार्य की सेवानिवृत्ति पर स्नेह मिलन कार्यक्रम का हुआ आयोजन
Palamu : हमीदगंज सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूल के संस्कृत और हिंदी के प्रिय आचार्य ऋषिकेश दुबे ने वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए।आचार्य के रूप में ऋषिकेश दुबे ने अपने छात्रों को संस्कृत और हिंदी के सूत्रों और सिद्धांतों से परिचित कराया। उनकी सरल और रोचक शिक्षण शैली के कारण छात्र संस्कृत और हिंदी को एक विषय के बजाय एक मज़ेदार पठन की तरह देखते थे। विद्या भारती योजना में वैदिक संस्कृत और हिंदी के क्षेत्रीय सह प्रमुख तथा प्रांतीय प्रमुख रहकर उन्होंने वैदिक संस्कृत और हिंदी को छात्रों एवं आचार्यो के बीच अपने आप को लोकप्रिय बनाया। उनके सम्मान में विद्यालय परिसर में स्नेह मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय के सचिव राजीव सिंह, अध्यक्ष अश्वनी मिश्र, प्रधानाचार्य चितरंजन कुमार सिंह,आचार्य अंजनी कुमार सिन्हा, उपेंद्र पाठक,सुशीला कुमारी,वंदना कुमारी,अजीत कुमार वर्मा,वेद प्रकाश,शैलेंद्र कुमार,चंदन कुमार,हिमांशु कुमार चौबे,रितेश कुमार शुक्ला की मुख्य रूप से उपस्थिति रही।
प्रबंधन समिति की ओर से ऋषिकेश दुबे और उनकी धर्म पत्नी को अंगवस्त्र तथा उपहार द्वारा सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर श्री ऋषिकेश दुबे ने कहा कि विद्या भारती योजना से जुड़कर मुझे सिर्फ संस्कृत और हिंदी ही नहीं बल्कि अन्य सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रो में सीखने तथा कार्य करने का अवसर मिला। मुझे अपने विद्यालय और मेरे छात्रों से बहुत लगाव रहा। मैं हमेशा उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता रहूंगा।
सचिव राजीव सिंह ने कहा कि ऋषिकेश दुबे के जाने से विद्यालय में एक शून्य खाली हो गया है।लेकिन उनकी शिक्षा हमेशा छात्रों के दिलों में रहेगी।
अध्यक्ष अश्वनी मिश्र ने उनके शांत एवं मधुर स्वभाव की प्रशंसा की। वही प्रधानाचार्य चितरंजन कुमार सिंह ने उनके सुखमय जीवन की कामना करते हुए कहा कि वे सदैव विद्या भारती के सिपाही के रूप में कार्य करते हुए वैदिक संस्कृत और हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करते रहे।
इस मौके पर विद्यालय के सचिव राजीव सिंह अध्यक्ष अश्विनी मिश्र, पत्रकार उपेंद्र कुमार और अभिषेक जौरिहार को भी अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।




