हुसैनाबाद : त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला के द्वितीय दिवस का हुआ सफल आयोजन।
आचार्यों के समर्पण और नवाचार से ही विद्यालय विकास संभव : अरुण कुमार चौधरी
Palamu : रस्वती शिशु विद्या मंदिर, जपला में आयोजित त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला के द्वितीय दिवस का शुभारंभ मुख्य अतिथि अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य अरुण कुमार चौधरी, प्रधानाचार्य कुशजी पाण्डेय एवं प्रभारी प्रधानाचार्य अखिलेश विश्वकर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि अरुण कुमार चौधरी ने विद्यालय विकास में आचार्यों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य केवल शिक्षण कार्य तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के मार्गदर्शक होते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्यों के आचरण, अनुशासन एवं समर्पण से ही विद्यालय की गुणवत्ता एवं पहचान निर्मित होती है। यदि सभी आचार्य नवाचार एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें, तो विद्यालय निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर होता है।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में सरस्वती वंदना के उपरांत विद्यालय की कार्ययोजना निर्माण पर विस्तार से चर्चा की गई। बाल विकास, आचार्य विकास, समिति विकास एवं अभिभावक सहभागिता जैसे बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का निर्धारण किया गया।
द्वितीय सत्र में शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की उत्कृष्टता तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विचार-विमर्श हुआ।
तृतीय सत्र में समय सारणी निर्माण की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए आचार्यों की रुचि एवं क्षमता के अनुसार कार्य विभाजन की रूपरेखा बनाई गई।
चतुर्थ सत्र में पाठ्यक्रम क्रियान्वयन, आंग्ल एवं संस्कृत संभाषण की व्यवस्था, सुलेख, वेश-भूषा एवं बस्ता व्यवस्था की समीक्षा की गई। “अपना विद्यालय सर्वश्रेष्ठ कैसे बने” विषय पर भी सार्थक चर्चा हुई।
पंचम सत्र में गृहकार्य एवं कक्षाकार्य के प्रभावी निष्पादन, अध्यापन कौशल के विकास तथा पाठ-टीका लेखन की विधि पर विचार किया गया। साथ ही पंचपदी शिक्षण प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया गया।
अंत में सभी आचार्यों ने कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान एवं अनुभवों को विद्यालय के समग्र विकास में उपयोग करने का संकल्प लिया।



