गैस सिलिंडर का स्टॉक खत्म होने से मिट्टी के चूल्हों पर लौटी जिंदगी
Varsnasi : पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात के बीच काशी में रसोई गैस की किल्लत गंभीर हो गई है। सहालग और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों के बीच जिले में गैस सिलिंडर की कमी ने जनजीवन पर असर डालना शुरू कर दिया है। काशी में चलने वाले अन्न क्षेत्रों में गैस सिलिंडर के स्टॉक खत्म हो रहे हैं, तो वहां चूल्हे लग गए हैं। शहर के कई बड़े होटलों में भी अब चूल्हे पर भोजन बनना शुरू हो गया है। मठ-मंदिरों में चलने वाले अन्नक्षेत्र में सुबह के नाश्ते में कटौती की तैयारी कर ली गई है। एजेंसियों पर सुबह से ही लंबी लाइनें लग रही हैं। कुछ एजेंसियों में सर्वर डाउन होने की बात कही गई, तो कहीं एजेंसी बंद मिलने से लोग नाराज होकर लौट गए।अंधरापुल स्थित होटल रीजेंसी में गैस सिलिंडर खत्म होने पर बुधवार की शाम से चूल्हे पर भोजन बनाया जाने लगा। होटल के ऑपरेशनल मैनेजर गौरव प्रजापति ने बताया कि कमर्शियल सिलिंडर की उपलब्धता पूरी तरह से ठप है। मजबूरी में होटल की छत पर दो अस्थायी मिट्टी के चूल्हे बनाए गए हैं। यहां शेफ और कारीगर मेहमानों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं।

छावनी क्षेत्र के रेस्टोरेंट संचालक डीके मिश्रा ने बताया कि उनके पास मात्र एक दिन का स्टॉक शेष है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो चूल्हे के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
गैस सिलिंडर क्राइसिस के बीच इंडक्शन चूल्हा और इलेक्ट्रिक कैटल्स की खरीदारी में अचानक बढ़ोतरी हो गई है। इसे खरीदने के लिए शोरूम और इलेक्ट्रॉनिक की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। सिगरा, रथयात्रा, लहुराबीर, कोदई चौकी, बुलानाला समेत विभिन्न बाजारों में बृहस्पतिवार को ग्राहकों की भीड़ नजर आई। ऑनलाइन कंपनियों ने अपने रेट 10-15 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं, जिसके कारण लोगों का रुझान इस ओर बढ़ा हुआ है।
स्थिति यह है कि ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर सुबह जिस इंडक्शन चूल्हे के दाम 1,000-1,500 रुपये बढ़े हुए नजर आ रहे थे, शाम होते-होते उसके स्टॉक ही समाप्त हो गए।




