घने कोहरे से ढका पलामू, नैनीहालों की मासूम जिंदगियां खतरे में, नवीन तिवारी ने जिला प्रशासन से की भावुक अपील

Palamu : पलामू जिला पिछले तीन दिनों से घने कोहरे की चादर में लिपटा हुआ है।सुबह होते ही सड़कों पर कुछ ही कदम आगे देख पाना मुश्किल हो जाता है।ऐसे भयावह हालात में सबसे ज्यादा संकट में हैं वे मासूम नौनिहाल,जो बस्तों का बोझ उठाए,ठिठुरते शरीर और सहमी आंखों के साथ स्कूल जाने को मजबूर हैं।इस गंभीर और चिंताजनक स्थिति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता नवीन तिवारी ने जिला प्रशासन से सीधी और भावुक अपील की है। उन्होंने कहा “प्रशासन से मेरा हाथ जोड़कर अनुरोध है कि कृपया नौनिहालों की मजबूरी को समझें।ये बच्चे देश का भविष्य हैं,लेकिन आज उनका वर्तमान खतरे में है।
नवीन तिवारी ने कहा कि घने कोहरे के कारण सड़कों पर हर पल हादसे का साया मंडरा रहा है। कई बच्चे पैदल,साइकिल और ऑटो व स्कूल बसों से स्कूल जाते हैं,जहां सामने से आती गाड़ियों का पता तक नहीं चल पाता।एक छोटी सी लापरवाही किसी मासूम की जिंदगी छीन सकती है।इसका जिम्मेदार कौन होगा?”यह सवाल उन्होंने प्रशासन के समक्ष रखा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ठंड और कोहरे का असर बच्चों के नाजुक शरीर पर गहराई से पड़ रहा है।कांपते हाथ,सुन्न होते पैर और भीगे कपड़ों में स्कूल जाते बच्चे प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे हैं।सर्दी, बुखार और निमोनिया जैसी बीमारियां तेजी से बच्चों को अपनी चपेट में ले रही हैं।
नवीन तिवारी ने जिला प्रशासन से की स्कूल बंद करने की मांग

नवीन तिवारी ने जिला प्रशासन से मांग की कि बच्चों की जान और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभाव से स्कूलों को कुछ दिनों के लिए बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि किताबें बाद में पढ़ी जा सकती हैं लेकिन एक मासूम की जान लौटकर नहीं आती। उन्होंने यह भी कहा कि जिले के हजारों अभिभावक भय और चिंता में अपने बच्चों को स्कूल भेजने को मजबूर हैं। हर सुबह माता-पिता के दिल में डर रहता है कि बच्चा सुरक्षित लौटेगा या नहीं। अब पलामू की जनता की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते संवेदनशीलता दिखाएगा या किसी अनहोनी के बाद निर्णय लिया जाएगा। उम्मीद है कि प्रशासन मानवता और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए नौनिहालों की सुरक्षा के लिए तुरंत ठोस कदम उठाएगा।




