
पलामू टाइगर रिजर्व में अनियमितताओं पर फूटा जनाक्रोश, हजारों ग्रामीणों का प्रदर्शन, रेंजर के खिलाफ जांच की मांग
Niranjan prasad @ united palamu
गारु :पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार एवं ग्रामीणों के उत्पीड़न के विरोध में महुआडांड़ अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न गांवों के हजारों ग्रामीणों का आक्रोश गुरुवार को खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में महिला पुरुष एकजुट होकर वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन पर उतरे और संविदा रेंजर तरुण कुमार सिंह के विरुद्ध उच्चस्तरीय जांच एवं सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।प्रदर्शन के दौरान पूरा क्षेत्र नारों से गूंज उठा। आक्रोशित ग्रामीणों ने “वन विभाग होश में आओ, तरुण सिंह वापस जाओ”, “झूठे मुकदमे बंद करो”, “निर्दोषों को न्याय दो”, “रोजगार छीनना बंद करो” जैसे नारे लगाए। इसके साथ ही “वन विभाग के दलाल होश में आओ”, “विधायक प्रतिनिधि होश में आओ” एवं “प्रभारी वनपाल निर्भय सिंह होश में आओ” जैसे नारों के जरिए ग्रामीणों ने अपना विरोध दर्ज कराया।ग्रामीणों का आरोप है कि पलामू टाइगर रिजर्व में कार्यरत संविदा रेंजर तरुण कुमार सिंह द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए मनमानी, भ्रष्टाचार तथा आम लोगों के साथ अभद्र एवं दमनात्मक व्यवहार किया जा रहा है। वन क्षेत्र से जुड़े मामलों में ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है तथा कई बार फर्जी मुकदमे भी दर्ज कराए जाते हैं, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।ग्रामीणों ने कहा कि यह स्थिति न केवल प्रशासन की छवि को धूमिल कर रही है, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक एवं मानवीय अधिकारों का भी उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर जनाक्रोश और तेज हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं

रेंजर तरुण कुमार सिंह के खिलाफ सभी आरोपों की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।पूर्व में लगे आरोपों की पुनः जांच की जाए।कथित उत्पीड़न एवं दुर्व्यवहार के मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए।वन विभाग के कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।हटाए गए मजदूरों को पुनः काम पर रखा जाए।ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और उनके अधिकारों की रक्षा की जाए।पेसा अधिनियम के तहत ग्राम सभा की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।वन विकास कार्यों में मशीनों के बजाय स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता दी जाए।ग्रामीणों ने प्रशासन को 15 दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो वे व्यापक जन आंदोलन करने को बाध्य होंगे।यह घेराव लालमटिया स्टेडियम से शुरू होकर बारेसाढ़ वन क्षेत्र कार्यालय तक लगभग 5 घंटे तक चला। प्रदर्शन के दौरान ग्राम प्रधान , मिट्ठू सिंह (डेढ़गांव), अनिल ब्रिजिया (दौना), सत्यनारायण सिंह (मायापुर), प्रकाश मुंडा, लाट्टू मरियाना, मंगरा, अमरजीत खरवार (बंदुआ), पंकज सिंह (डाडकोचा) सहित हजारों की संख्या में ग्रामीण मौजूद थे इधर, वन परिसर में अधिकांश कर्मी अनुपस्थित पाए गए।
परमजीत तिवारी ने ग्रामीणों का आवेदन प्राप्त किया
इस बीच डीएफओ के प्रतिनिधि के रूप में प्रभारी वनपाल परमजीत तिवारी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों का आवेदन प्राप्त किया। इस संबंध में डीएफओ कुमार आशीष ने बताया कि ग्रामीणों के मांग पत्र को संबंधित उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है तथा मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।इस कार्यक्रम को झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का नैतिक समर्थन प्राप्त था। संगठन के पलामू प्रमंडल अध्यक्ष पप्पू यादव, लातेहार युवा मोर्चा अध्यक्ष निशांत यादव, जिला उपाध्यक्ष पुनीत सिंह, चेरो अध्यक्ष कुलदीप नायक, जिला कार्यकारिणी सदस्य प्रेम शंकर एवं प्रखंड सचिव दीपक सोनी सहित अन्य पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही।





