पलामू पर हेमंत सरकार की तिरछी नजर ! JTET नियमावली 2026 का हो रहा जोरदार विरोध
Palamu : पलामू प्रमंडल यानी पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले का आम जनमानस काफी गुस्से में है और उबल रहा है। झारखंड की सरकार यानी हेमंत सोरेन की सरकार पलामू के युवा वर्ग के साथ छल कर रही है। पलामू प्रमंडल में जेटेट नियमावली 2026 का जमकर विरोध हो रहा है। इस विरोध का कारण भी है। बता दें कि पलामू की मुख्य भाषा हिंदी, भोजपुरी एवं मगही है। सरकार द्वारा जो जेटेट नियमावली 2026 बनाया गया है, इसमें हिंदी, भोजपुरी एवं मगही भाषा को नहीं रखा गया है। इस कारण यहां के छात्र व छात्राओं सहित पूरा जनमानस खफा है। सरकार का यह कदम यहां के युवाओं का भविष्य चौपट करने वाला है। यही कारण है कि इस नियमावली का पलामू में जोरदार विरोध हो रहा है। इस विरोध में करीब-करीब हर कोई शामिल है।

क्या कहते हैं पलामू के सांसद वीडी राम

इस मामले को लेकर पलामू के सांसद और झारखंड के अवकाशप्राप्त DGP विष्णु दयाल राम कहते हैं, “झारखंड सरकार द्वारा जारी झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) नियमावली 2026 में पलामू प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों : पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के युवाओं के साथ क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर किया गया प्रावधान अत्यंत निराशाजनक एवं अन्यायपूर्ण प्रतीत होता है। हिंदी, भोजपुरी एवं मगही जैसी व्यापक रूप से बोली और समझी जाने वाली भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची से बाहर रखना न केवल स्थानीय अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव है, बल्कि उनके भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। मैं इस निर्णय का घोर विरोध करता हूँ। राज्य सरकार इस विषय पर पुनर्विचार करे। पलामू प्रमंडल के युवाओं की भाषाई पृष्ठभूमि और वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए हिंदी, भोजपुरी एवं मगही को भी क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।झारखंड राज्य सरकार से अनुरोध है कि वह न्यायसंगत निर्णय लेते हुए युवाओं के हितों की रक्षा करे और इस प्रकार के भेदभावपूर्ण प्रावधानों को शीघ्र संशोधित किया जाए।”
झारखंड के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने नियमावली में संशोधन की मांग की

झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री और डाल्टनगंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक केएन त्रिपाठी ने कहा, “सरकार ने पिछली बार की तरह पलामू, गढ़वा और लातेहार से भोजपुरी व मगही और संथाल परगना से अंगिका और मैथिली को हटा दिया, जबकि 2022 में हमारे आंदोलन के बाद इन भाषाओं को इन जिलों में जोड़ा गया था, मैं सरकार से पुनः मांग करता हूँ कि यथाशीघ्र संशोधन करके इसे लागू करे।”



