भारत में 1 अप्रैल 2026 से 6 दशक पुराने आयकर कानून की होने वाली है विदाई
New Delhi : भारत में 1 अप्रैल 2026 से एक बड़ा बदलाव हो रहा है। छह दशक पुराने आयकर कानून की विदाई होने वाली है। अब ‘आयकर अधिनियम, 2025’ अमल में आने वाला है। वहीं, जीएसटी 2.0 के तहत घोषित एलानों के लागू होने के बाद अब देश का वित्तीय ढांचा पूरी तरह से बदलने की ओर बढ़ रहा है। इन बदलावों का सीधा असर आम आदमी के वेतन, बचत, रसोई गैस और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा यह तय है। कर निर्धारण वर्ष 2026-27 से सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त करने का एलान कर रखा है। दूसरी तरफ, पश्चिम एशिया के तनाव और नए विनियामक नियमों के कारण एलपीजी, दवाएं और कारें महंगी हो रही हैं।

ये काम आज पूरे करने होंगे
- टैक्स सेविंग और निवेश: धारा 80C और 80D के तहत टैक्स छूट पाने के लिए पीपीएफ, ईएलएसएस, और जीवन बीमा में निवेश 31 मार्च से पहले कर लें, अन्यथा इसका लाभ चालू वित्त वर्ष में नहीं मिलेगा।
- खातों को सक्रिय रखना: पीपीएफ, एनपीएस और सुकन्या समृद्धि योजना को निष्क्रिय होने और पेनल्टी से बचाने के लिए न्यूनतम अनिवार्य राशि जमा करना आवश्यक है।
- अपडेटेड रिटर्न: वित्तीय वर्ष 2020-21 (आकलन वर्ष 2021-22) के लिए अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने की आखिरी समय-सीमा 31 मार्च है।
- विदेशी आय वालों के लिए: एनआरआई को विदेशी कर क्रेडिट का दावा करने के लिए ‘फॉर्म 67’ इसी दिन तक जमा करना होगा, अन्यथा दोहरे कराधान का सामना करना पड़ सकता है।
1 अप्रैल से क्या-क्या बदल रहा है ?
- नई टैक्स व्यवस्था: 12 लाख रुपये तक की शुद्ध वार्षिक आय वालों की टैक्स देनदारी शून्य कर दी गई है। इसके साथ ही वेतनभोगियों के लिए 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन जारी रहेगा।
- पुरानी व्यवस्था में भारी छूट: बच्चों की शिक्षा भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह और हॉस्टल भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया गया है। पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी एचआरए के लिए टियर-1 (50% छूट) में शामिल कर लिया गया है।
- निवेश पर टैक्स: अब सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मैच्योरिटी के समय कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर एसटीटी बढ़ा दिया गया है, और कंपनियों के शेयर बायबैक पर शेयरधारकों को टैक्स देना होगा।




