
महुआडांड़ में जल जीवन मिशन की खुली नाकामी, आदिवासी गांव जामडीह में सरकारी व्यवस्था ध्वस्त
Sanjay prajapati @ united palamu

महुआडांड़:प्रखंड अंतर्गत ओरसा पंचायत में स्थित अनुसूचित जनजाति बहुल जामडीह ग्राम में सरकार की बहुचर्चित जल जीवन मिशन योजना पूरी तरह फेल हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि 21वीं सदी में भी आदिवासी ग्रामीण प्यास और बीमारी के साए में जीने को मजबूर हैं।
कागजों में योजना सफल, गांव में पानी गायब
सरकारी दस्तावेजों में जामडीह गांव को नल-जल योजना से पूरी तरह आच्छादित दिखाया गया है, लेकिन जमीनी सच्चाई इसके ठीक उलट है। गांव में बनी जल मीनारें सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं। वर्षों से मोटर बंद पड़ी है, टंकी खाली है और पाइपलाइन से एक बूंद पानी तक नहीं निकलता। यह सीधा-सीधा सरकारी निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर करता है।
नल सूखे, मजबूरी में नाला का पानी
नल-जल योजना ठप होने के बाद ग्रामीण पास के चुआरी (नाला/झरना) का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। यही पानी पीने, खाना बनाने और बच्चों को पिलाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। बरसात के मौसम में यही पानी कीचड़ और गंदगी से भर जाता है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
महिलाओं और बच्चों पर सबसे बड़ा बोझ
गांव की महिलाएं रोज़ कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाती हैं। कई बार छोटे बच्चों को भी साथ ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, दूषित पानी पीने से बच्चों में लगातार उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार की शिकायत सामने आ रही है। सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से पानी देने का दावा कर रही है, तो जामडीह के बच्चों को गंदा पानी क्यों पीना पड़ रहा है
शिकायतें दर्ज, लेकिन कार्रवाई शून्य
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालय तक कई बारशिकायत की, लेकिन न तो कोईअधिकारी गांव पहुंचा और न ही किसी तकनीकी टीम ने जल मीनारों की जांच की। हर बार सिर्फ आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि कहीं यह पूरी योजना सिर्फ कागजी खानापूर्ति और भुगतान निकालने का जरिया तो नहीं थी।
करोड़ों का खर्च, जिम्मेदार कौन?
जब जल जीवन मिशन पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो फिर सवाल उठना लाज़मी है पानी आखिर गया कहां?राशि का उपयोग किसने और कैसे किया?जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?यह मामला अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और जवाबदेही की गंभीर कमी की ओर इशारा करता है।
प्रशासन की चुप्पी, आदिवासी इलाकों के साथ अन्याय
स्वच्छ पेयजल के अभाव में स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है, लेकिन पेयजल और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। यह स्थिति साफ बताती है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में योजनाओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।
अब कार्रवाई चाहिए, बयान नहीं
जामडीह गांव की हालत साफ संदेश दे रही है कि जल जीवन मिशन यहां सिर्फ फाइलों और फोटो तक सीमित है।यदि जल्द से जल्द जल मीनारों की मरम्मत, वैकल्पिक जल स्रोत और नियमित जल आपूर्ति शुरू नहीं की गई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग, ठेकेदार और जिला प्रशासन की होगी।




