शहीदों का बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं,प्रेरणा और संकल्प का आधार है: कमलेश उराँव

लातेहार: होतवाग जोगनाटांड़ की धरती पर वीर शहीद नीलांबर-पीतांबर के 168वें शहादत दिवस के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उनके त्याग, संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए शत-शत नमन किया गया।कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वीर शहीदों का बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी हमारी प्रेरणा और संकल्प का आधार है। नीलांबर-पीतांबर ने अंग्रेजों के अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध जो संघर्ष किया, वह हर पीढ़ी को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करता है।छात्र नेता कमलेश उराँव ने कहा कि नीलांबर और पीतांबर झारखंड के पलामू क्षेत्र के दो महान आदिवासी सहोदर भाई और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया था। भोगता/खरवार जनजाति में जन्मे इन वीरों ने चेरो और खरवार समाज को एकजुट कर शाहपुर और लेसलीगंज जैसे क्षेत्रों में ब्रिटिश हुकूमत को कड़ी टक्कर दी।उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि सभी युवा साथियों को नीलांबर-पीतांबर के बताए मार्ग पर चलने की जरूरत है। आज के युवाओं के लिए केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों और अपने पूर्वजों के इतिहास को जानना और समझना भी उतना ही आवश्यक है।

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