सतबहनी झरना का नजारा लेने झारखंड सहित उत्तर प्रदेश और बिहार से पहुंचते हैं पर्यटक

Gadhwa : गढ़वा जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर कांडी प्रखंड में स्थित सतबहनी झरना तीर्थ स्थल नववर्ष के अवसर पर आस्था, पर्यटन और पिकनिक का प्रमुख केंद्र है। करीब 300 वर्ष प्राचीन यह स्थल अपने 30 फीट ऊंचे दूधिया झरने और नौ प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।सतबहनी झरना परिसर में मां दुर्गा, भगवान शिव, गणेश, सूर्य देव, बजरंगबली और भैरवनाथ सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां दर्शन और पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के चलते दूर-दराज से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।करीब 24 एकड़ क्षेत्र में फैले इस स्थल को फरवरी 2019 में पर्यटन स्थल का दर्जा मिला था।

सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है सतबहिनी झरना

सतबहनी झरना गढ़वा जिला ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड, उत्तरप्रदेश और बिहार राज्य के लोगों के लिए एक लोकप्रिय पर्यटन और पिकनिक स्थल के रूप में विकसित हो चुका है। नववर्ष के दिन यहां हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे अपने पूरे परिवार के साथ पिकनिक मनाने पहुंचे।प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर सतबहनी झरना क्षेत्र में पत्थरों की आकर्षक श्रृंखला, ऊंचे-नीचे टीलों के बीच बहती पंडी नदी और चोराटी पहाड़ी का मनोरम दृश्य सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। झरने के आसपास लोग पिकनिक मनाते हैं और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते हैं।

सतबहिनी झरना के आसपास मौजूद है कई पिकनिक स्पॉट

सैलानियों की सुरक्षा को लेकर कांडी थाना की पुलिस गश्ती टीम लगातार क्षेत्र में तैनात रहती है। स्थानीय समिति के सदस्य भी सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय रहते हैं। पूर्ण रूप से सुरक्षित पिकनिक स्थल होने के कारण सतबहनी झरना लोगों की पहली पसंद है।सतबहनी झरना के आसपास भीम बराज, चटनिया डैम, सोन नदी, सुंडीपुर स्थित संगम और कोयल नदी पुल जैसे कई अन्य दर्शनीय और पिकनिक स्पॉट भी मौजूद हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। आस्था, प्रकृति और पर्यटन का यह संगम सतबहनी झरना को गढ़वा जिले की पहचान के रूप में स्थापित कर रहा है।

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