2 सप्ताह के लिए युद्ध विराम पर सहमत हुए अमेरिका, इजराइल और ईरान

Newyark-Tehran: अमेरिका आखिरकार दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर सहमत हो गया। इस पर इजराइल ने भी हां कर दी है। दोनों ने मध्यस्थ देशों का मान रख लिया और अब ईरान के साथ आमने-सामने की बातचीत की तैयारी की जा रही है। 28 फरवरी से ईरान के साथ छिड़े युद्ध की लपटों में अमेरिका और इजराइल के मददगार देश भी झुलस चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल ट्रुथ पर दो हफ्ते के युद्ध विराम के ऐलान से दुनिया ने बड़ी राहत महसूस की है। अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले रोक दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन अब ईरान के साथ सीधी (आमने-सामने की) बातचीत की तैयारी कर रहा है।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संभवतः उप राष्ट्रपति जेडी वैंस करेंगे। इसका मकसद दीर्घकालिक समझौते का प्रारूप तैयार करना है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने माना कि इस समय आमने-सामने की बातचीत की चर्चा चल रही है। उन्होंने साफ किया कि इसकी अंतिम घोषणा राष्ट्रपति या व्हाइट हाउस करेंगे।

कुछ अधिकारियों ने बताया कि यह बैठक संभवतः पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होगी। इन अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, दामाद जेरेड कुशनर और उप राष्ट्रपति जेडी वैंस के इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि वैंस इस समय हंगरी के दौरे पर हैं। उधर, ईरान के खिलाफ शुरू किए सैन्य अभियान में अमेरिका के सहयोगी इजराइल के अधिकारी ट्रंप के रुख में अचानक आए बदलाव से आश्चर्यचकित हैं। हालांकि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की सहमति पर अपनी हां कर दी है। इससे साफ हो गया है कि इजराइल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अनुसरण करते हुए इस संघर्ष विराम का पालन करेगा।

इस बीच एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर हमले रोक दिए हैं। ईरान ने कहा है कि संघर्ष विराम के दौरान उसकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के आवागमन को नियंत्रित करेगी। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि ईरान की 10 सूत्री योजना को स्वीकार कर लिया गया है। यह योजना “कुछ बुनियादी मामलों पर जोर देती है,” जैसे कि “ईरान की सशस्त्र सेनाओं के समन्वय के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का नियंत्रित आवागमन।” बयान में कहा गया है कि इससे ईरान को एक विशिष्ट आर्थिक और भू-राजनीतिक दर्जा प्राप्त होगा।

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