
Medininagar Nagar Nigam Election : मेयर चुनाव में भाजपा की अग्नि परीक्षा
Palamu : झारखंड में नगर निकाय का चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है। वहीं यह चुनाव अघोषित रूप से दलीय आधार पर लड़ा जा रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण भी मिल रहा है। अगर हम बात करें मेदनीनगर नगर निगम चुनाव की तो यहां स्पष्ट रूप से यह चुनाव दलीय आधार पर दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अरुणा शंकर को अपना समर्थित प्रत्याशी मान लिया है। यही कारण है कि भाजपा का पूरा कुनबा पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर की धरती पर उतर चुका है। यहां देश स्तर के भाजपा नेता, जो राष्ट्रीय महासचिव भी हैं, पहुंचे। यहां पहुंचते ही उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरा। मेयर का मेनिफेस्टो जारी किया और प्रत्याशी अरुणा शंकर के साथ जोश भरे अंदाज में रोड शो किया। मतलब साफ है।

मेयर प्रत्याशी अरुणा शंकर को विजय माला पहनने के लिए पार्टी कमर कस कर चुनाव मैदान में उतर चुकी है। भाजपा के कार्यकर्ता भी पूरे जोश में देखे जा रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह के साथ पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम, विधायक आलोक चौरसिया, चुनाव प्रभारी भानु प्रताप शाही, प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह, जिला अध्यक्ष अमित तिवारी आदि ने रोड शो कर पार्टी की एकजुटता का परिचय दिया।
ऐसे में एक बड़ा सवाल भी लोगों के मन व मस्तिष्क में कौंध रहा है। वह सवाल है, निगम के चुनाव में क्या पार्टी एकजुट है ? इसका साफ़-साफ़ उत्तर है : नहीं। नगर निगम के चुनाव में पार्टी अगर एकजुट रहती तो निगम के पूर्व उपमहापौर और भाजपा नेता राकेश सिंह उर्फ मंगल सिंह को भाजपा कारण बताओं नोटिस जारी नहीं करती। भाजपा का प्रदेश नेतृत्व द्वारा राकेश सिंह उर्फ मंगल सिंह को, जो नोटिस जारी किया गया है, उसमें साफ-साफ उनके पार्टी विरोधी होने का जिक्र किया गया है। इस बात में सच्चाई भी है।
राकेश सिंह उर्फ मंगल सिंह इस चुनाव में अपने पत्नी संजू सिंह को मेयर का प्रत्याशी बनाकर भाजपा को खुला चुनौती दिए हैं। मेयर पद के दो और लोग हैं, जो चुनाव में पार्टी को चुनौती पेश किए हैं। एक हैं परशुराम ओझा जो अपनी पत्नी को मेयर का चुनाव लड़ा रहे हैं। दूसरा हैं मीना गुप्ता जो खुद चुनाव लड़ रही है। इन दोनों पर पार्टी ने अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया है। ऐसी स्थिति में भाजपा को भीतरघात का भय भी सता रहा है।
राकेश सिंह उर्फ मंगल सिंह, परशुराम ओझा और मीना गुप्ता से इस चुनाव में पार्टी को भीतरघात का भय जरूर है। इस बात को खुद पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी समझ रहे हैं। इस मामले को देखते हुए पार्टी के बड़े नेता डैमेज कंट्रोल करने में जुटे हुए हैं। ऐसे भारतीय जनता पार्टी अपना पूरा ताकत पार्टी समर्थित प्रत्याशी अरुण शंकर को विजय माला पहनने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। चुनाव प्रभारी भानु प्रताप शाही भी अपने स्तर से पूरा दम लगाए हुए हैं।
पलामू जिला के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी कोई कसर छोड़ना नहीं चाहते। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि मेयर पद के इस चुनाव में भाजपा की अग्नि परीक्षा है। इस अग्नि परीक्षा में बीजेपी कितना सफल होती है, यह तो 27 फरवरी को ही तय होगा।




