
Palamu Fort : पर्यटकों के लिए स्वर्ग है बेतला नेशनल पार्क के मनोरम वादियों में स्थित पलामू किला

Palamu : झारखंड के लातेहार जिला स्थित बरवाडीह थाना क्षेत्र में स्थित पलामू किला भारतीय इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बेतला नेशनल पार्क के पास औरंगा नदी के किनारे स्थित, यह किला अपने ऐतिहासिक महत्व और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। पलामू किला झारखंड का एक अनोखा पर्यटन स्थल है, जहाँ सालों भर सैलानी आते रहते हैं। यह पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। पलामू किला दो हिस्सों में विभाजित है : पुराना किला और नया किला। पुराना किला रक्सेल राजाओं द्वारा शुरू किया गया था, और राजा मेदिनी राय ने 1661 में इसे पुनर्निर्मित किया। यह 25 फीट ऊँची और 7 फीट मोटी दीवारें, एक भव्य गेटवे, और एक गहरा कुआँ से सुसज्जित है।नया किला, जिसे राजा मेदिनी राय ने 1663 में बनवाया। यह अपनी भव्यता और अद्वितीय डिजाइन के लिए जाना जाता है। इस किले ने कई ऐतिहासिक घटनाओं को देखा, जिसमें रक्सेल राजाओं, मुगलों और अंग्रेजों के आक्रमण शामिल हैं। इसकी दीवार 17 फीट मोटी है। यह किला भव्य वास्तुकला के साथ कई वास्तुशिल्प विशेषताएँ समेटे हुए है।
आकर्षण का केंद्र है कमलदह तालाब
पलामू किले के ठीक आगे एक बड़ा तालाब है, जिसे स्थानीय भाषा में कमलदह कहा जाता है। स्थानीय भाषा में कमल का अर्थ कमल और दह का अर्थ तालाब होता है। कहा जाता है कि यह तालाब कभी कमल के पत्तों और फूलों से भरा रहता था। यह वही तालाब है, जहाँ चेरो वंश की रानियाँ प्रतिदिन स्नान करने आती थीं। तालाब आज भी कमल के पौधों से ढका हुआ है। और ये पौधे खिलते ही एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करते हैं।

पलामू किला के प्रतापी राजा थे मेदिनी राय
पलामू किले पर 14 चेरो राजाओं ने शासन किया. पलामू to पर चेरो राजवंश का करीब 250 वर्षों तक शासन रहा। सबसे प्रतापी राजा मेदिनी राय हुए। इन्हीं के नाम पर प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर शहर बसा है. राजा मेदिनिराय को लेकर आज भी उस जमाने का एक कहावत प्रसिद्ध है:धन-धन राजा मेदनिया, घर-घर बाजे मथनिया। राजा मेदिनी राय के राज में दूध और दही की कमी नहीं थी। कोई भूखा नहीं रहता था। उनके शासन काल में प्रजा बहुत खुशहाल और प्रसन्न रहती थी। पूरे राज्य की प्रजा के पास किसी चीज की कमी नहीं थी.

बेतला नेशनल पार्क के मनोरम वादियों में स्थित है पलामू किला
पलामू किला बेतला नेशनल पार्क के मनोरम वादियों में स्थित है। बेतला नेशनल पार्क झारखंड का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है।यह भारत के शुरुआती बाघ अभयारण्यों में से एक है, जो अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां बाघ, हाथी, तेंदुआ, और कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। यहां पर्यटकों के लिए जीप या हाथी सफारी के साथ प्रकृति और वन्यजीवों का अनुभव करने का शानदार सुविधा उपलब्ध है। सन 1932 में पहली बार बाघों की गणना यहीं हुई थी। 1974 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत इसे भारत के पहले बाघ अभयारण्यों में शामिल किया गया। यहाँ साल और बांस के घने जंगल हैं। इस पार्क में बाघ, हाथी, तेंदुआ, जंगली भैंस, भेड़िया, भालू, सांभर, चीतल और विभिन्न पक्षी जैसे मोर, हॉर्नबिल आदि देखे जा सकते हैं। बेतला नेशनल पार्क 1,026 वर्ग किमी में फैला विशाल जगह है। यहां झारखंड ही नहीं बल्कि देश-विदेश से भी पर्यटक मनोरम वादियों का नजारा लेने पहुंचते हैं।





