
काश्मीर, शिमला और नैनीताल से कम नहीं है पलामू का लातेहार जिला
SUNJAY PRAJAPATI
News Editor
united palamu.com
लातेहार: पलामू प्रमंडल के लातेहार जिले को प्रकृति ने अपने हाथों से सजाया है और संवारा है। इस जिले में एक से बढ़कर एक ऐसे पर्यटक स्थल हैं जो काश्मीर, शिमला और नैनीताल से कम नहीं है। यहां नेतरहाट एक ऐसा जगह है, जिसको झारखंड का काश्मीर कहा जाता है।लातेहार जिला, वर्ष 2025 के अंत और 2026 के आरम्भ में देश–विदेश के पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। घने जंगलों, मनोहर वादियों, बहते झरनों, प्राचीन किलों, रहस्यमयी कथाओं और शांत हिल-स्टेशनों से भरपूर यह जिला प्रकृति-प्रेमियों, साहसिक यात्रियों तथा संस्कृति-चाहने वालों के लिए एक आदर्श गंतव्य बन रहा है।नववर्ष से पहले ही विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों का जमावड़ा बढ़ने लगा है।

नेतरहाट : छोटा नागपुर की रानी व प्रकृति का मुकुट
1128 मीटर की ऊँचाई पर स्थित नेतरहाट झारखंड का प्रमुख हिल स्टेशन है, जहाँ के सनराइज़ पॉइंट और कोयल व्यू पॉइंट पर सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।नेतरहाट स्कूल भी यहाँ का प्रमुख हेरिटेज स्थल है।स्थानीय लोगों के अनुसार, नेतरहाट की पहाड़ियों पर अक्सर बदलती धुंध, काले बादल और ठंडी हवाओं का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिलता है कि पर्यटक खुद को मानो किसी परी-लोक में महसूस करते हैं।
बेतला नेशनल पार्क : जंगल का जीवंत संसार

बरवाडीह प्रखण्ड में स्थित बेतला नेशनल पार्क, पलामू टाइगर रिज़र्व का हिस्सा है।
घने जंगल,वन्यजीवन, सैकड़ों पक्षी प्रजातियाँ और सफारी सुविधा इसे रोमांच-प्रेमियों का पसंदीदा स्थान हैं।
लोध फ़ॉल (महुआडांड़) : भारत के सर्वोच्च जलप्रपातों में से एक, जिसकी गूँज दूर तक सुनाई देती है।बुढ़ा नदी 468 फीट की ऊंचाई से गिरता है, और अपनी प्राकृतिक सुंदरता और घने जंगलों के कारण पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है, खासकर मानसून के दौरान।

मिर्चैया फ़ॉल (गारू) : हरियाली और शांत वातावरण के बीच छुपा हुआ स्वर्ग जैसा स्थान।सुगा बाँध जलप्रपात घने जंगल और पहाड़ियों के बीच पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय, मनमोहक पर्यटन स्थल है, जो लगभग 80-150 फीट की ऊंचाई से गिरता है। कान्ति झरना (चंदवा) शीतल जलधारा, चट्टानों पर गिरते फुहारों और प्राकृतिक ऊर्जा का केंद्र।
केचकी संगम : दो नदियों के मिलन से बना अत्यंत शांत और सौम्य पर्यटन स्थल।इन सभी स्थलों पर नववर्ष से पहले ही पर्यटक पिकनिक, घूमने और फोटोग्राफी के लिए बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं।

डाटम पाटम जलप्रपात : यह हेरहंज प्रखंड मुख्यालय से लगभग 3 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच है।यह कोयल नदी प्रणाली का हिस्सा है और प्रकृति प्रेमियों, ट्रेकिंग और फोटोग्राफी के लिए शानदार जगह है।इसकी ऊंचाई से गिरने वाला पानी और शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है।
तापा पहाड़ : जिला मुख्यालय से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित तापा पहाड़ धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहाँ ‘तापा महारानी’ और ‘तापा बाबा’ के मंदिरों में श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण होने की विश्वास के साथ पूजा करते हैं। पहाड़ी में मौजूद रहस्यमयी गुफाएं और सुरंगें राजा मेदिनीराय से जुड़ी मानी जाती हैं, जिनका रहस्य आज भी अनसुलझा है।वहीं तापा पहाड़ के गोद में बसे पिकनिक के लिए ललमटिया डैम शांत प्राकृतिक सुंदरता का आकर्षक स्थल है, जहाँ नौका विहार और ट्रैकिंग की तैयारी चल रही है।
चुंगरू में भीम पांव:
बरवाडीह प्रखंड के चुंगरू पंचायत अंतर्गत नावाडीह गांव के जंगल किनारे स्थित भीम पांव एक प्राचीन और अद्भुत स्थल है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। नदी किनारे स्थित चट्टानों पर राजा–रानी के पैरों के निशान, घोड़े के खुरों के निशान और कई प्रकार के प्राचीन चिन्ह आज भी मौजूद हैं। स्थानीय लोगों द्वारा मकर सक्रांति के अवसर पर यहां एक दिवसीय मेला आयोजित किया जाता है। उस दिन बजरंगबली का झंडा स्थापित कर पूजा-पाठ किया जाता है, जिससे यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है।
रानी दह : गारू प्रखंड के घने जंगलों के बीच स्थित रानी दह का रहस्य इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक मान्यताओं में छिपा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी इस दह में इतना गहरा पानी है कि उसमें सात खटिये की बाध डुब जाएगी।बताया जाता है कि पहले बड़े-बड़े जमींदार और ठाकुर यहाँ पिकनिक मनाने आया करते थे, लेकिन नक्सलियों द्वारा कई बार उन्हें नुकसान पहुँचाए जाने के कारण लोगों का आना-जाना धीरे-धीरे बंद हो गया।आज भी घना जंगल होने के कारण वहाँ जाने की हिम्मत बहुत कम लोग कर पाते हैं।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें
नावागढ़ किला: जिला मुख्यालय से 11 किमी दूर स्थित यह किला सदियों पुरानी कहानियों और वीरता की गाथाओं का प्रतिनिधि है। माँ उग्रतारा मंदिर (चंदवा): धार्मिक आस्था और स्थानीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र।स्थानीय बुज़ुर्ग अब भी पुरखौली अफ़साने सुनाते हैं, जो किलों और गुफाओं की दीवारों में आज भी जीवंत महसूस होते हैं।
मंडल डैम : सुकून और रोमांच का मेल

मंडल डैम हाल के वर्षों में युवाओं, फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना है।नववर्ष के अवसर पर यहां, पिकनिक और शांत वातावरण का आनंद लेने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है।
हालाँकि, सुविधाओं की कमी, उचित रखरखाव, साफ-सफाई और गाइडिंग सेवाओं की जरूरत अभी भी महसूस की जा रही है।
निष्कर्ष: पलामू प्रमंडल में कई ऐसे पर्यटक स्थल और जगह हैं, जो अपनी ओर आकर्षित करते हैं। “यूनाइटेड पलामू” इन सभी पर्यटक स्थलों पर विशेष कवरेज अपने पाठकों के लिए दे रहा है। आप लगातार पढ़ते रहे यूनाइटेड पलामू का पोस्ट। आप अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें। हमको आपकी कमेंट का इंतजार रहेगा।




