Palamu: सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में धूमधाम से मना शिक्षक दिवस व जन्माष्टमी
Palamu : मेदिनीनगर शहर के हमीदगंज स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शनिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी और शिक्षक दिवस का कार्यक्रम श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया।विद्यार्थियों ने इन दोनों कार्यक्रमों में उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य चितरंजन सिंह ने भगवान श्री कृष्णा और सर्वप्रथम डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्प व अगरबत्ती जलाकर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए नमन किया। तत्पश्चात समस्त आचार्यगण व भैया बहनों ने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर भगवान श्री कृष्णा व सर्वप्रथम डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन किया। वही जन्माष्टमी त्योहार के अवसर पर बच्चे भगवान श्रीकृष्ण, राधा रानी, सुदामा और यशोदा मैया के रूप में सजकर स्कूल पहुंचे. माखन की मटकी, बांसुरी, मोरपंख और पीले कपड़ों में सजे बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से माता-पिता और शिक्षकों का मन मोह लिया।सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भजनों, सुंदर नृत्यों ने पूरे विद्यालय परिसर को भक्तिमय, उत्साही माहौल से सराबोर कर दिया

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्म, भक्ति, सत्य, प्रेम का मार्ग दिखाता है : चितरंजन सिंह
समारोह में विद्यालय के प्रधानाचार्य चितरंजन सिंह व अन्य सिक्षको की गरिमामयी उपस्थिति रही।वहीं मौके पर उपस्थित प्रधानाचार्य चितरंजन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्म, भक्ति, सत्य, प्रेम का मार्ग दिखाता है।उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन बच्चों को प्यार, धर्म और बिना फल की चिंता किये काम करने की सीख देता है. उन्होंने आशा व्यक्त की कि बच्चे इन सीखों को अपने जीवन में उतारेंगे. ऐसे आयोजन बच्चों को संस्कृति से जुड़ी बातों के साथ नयी चीजें सोचने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करते हैं।
प्रधानाचार्य चितरंजन सिंह ने शिक्षक दिवस पर कहा :
प्रधानाचार्य चितरंजन सिंह ने शिक्षक दिवस पर बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि साल 1962 की बात है, जब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला तो उनके कुछ पूर्व छात्र उनके पास पहुंच गए और 5 सितंबर को उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति मांगी। इस पर उन्होंने सुझाव दिया कि उनका जन्मदिन मनाने की बजाए इस दिन सभी शिक्षकों के सम्मान के लिए शिक्षक दिवस मनाया जाना चाहिए। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में घोषित कर दिया और तभी से हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

इनकी रही उपस्थिति
मौके पर विद्यालय के आचार्य दीपक कुमार,रितेश कुमार,अजीत कुमार,अनूप कुमार,वेद प्रकाश पिंटू कुमार,रंजन कुमार,वंदना कुमारी आराधना कुमारी सुप्राजित कुमारी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया।




