
आदित्य साहू बने झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने की घोषणा
Ranchi : प्रो. आदित्य साहू को झारखंड भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बुधवार को पार्टी के चुनाव अधिकारी एवं केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने आदित्य साहू के नाम की विधिवत घोषणा की। रांची के हरमू रोड स्थित कार्निवाल बैंक्वेट हॉल में नये प्रदेश अध्यक्ष का भव्य स्वागत किया गया। इसके अलावा मौके पर 21 राष्ट्रीय नव निर्वाचित सदस्यों के नामों की भी घोषणा की गयी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री उरांव ने कहा कि नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू एक सहज सरल व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्होंने अपने परिश्रम और समर्पण से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने साहू को बधाई देते हुए कहा कि झारखंड को विकसित झारखंड, अटल जी के संकल्पों का झारखंड बनाने के लिए भाजपा की सरकार बनानी है। उन्होंने कहा कि आदित्य साहू के नेतृत्व में संगठन को मजबूती मिलेगी और झारखंड में भाजपा एनडीए की मजबूत सरकार बनेगी। इससे पहले उन्होंने नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में प्रो आदित्य साहू के नाम की घोषणा की।
निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आदित्य साहू को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने साहू को बूथ, मंडल, जिला और प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष के रुप में गंभीरतापूर्वक कार्य करते हुए देखा है। जन समस्या और कार्यकर्ताओं के सुख दुख के प्रति उनकी संवेदशीलता सराहनीय है। बाबूलाला ने कहा कि झारखंड गठन के संकल्प अभी भी अधूरे हैं। राज्य की वर्तमान सरकार ने झारखंड को गर्त में धकेल दिया है। विधि व्यवस्था ध्वस्त है। अपराधी बेलगाम हैं और पुलिस वसूली में मस्त है। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार झारखंड की समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रही है। अभी भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा।
जीवन का कण-कण और क्षण-क्षण देंगे भाजपा को : आदित्य
प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आदित्यि साहू ने नई जिम्मेदारी देने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि नई जिम्मेदारी के लिए वे जीवन का कण-कण और क्षण क्षण भाजपा को देंगे। साहू ने पूर्व प्रदेश अध्येक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की तारीफ करते हुए कहा कि एक बड़े भाई ने छोटे भाई को जिम्मेदारी सौंपी है। बाबूलाल मरांडी राज्य के धरोहर हैं। उन्हें संगठन और सरकार चलाने का व्यापक अनुभव है। उन्होंने राज्य सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली बनाने से पहले राज्ये सरकार को दूसरे राज्यों की भी नियमवली का अध्य यन कर लेना चाहिए था। उन्होंने सरकार पर आदिवासियों के साथ छल करने का आरोप लगाया। यदि सरकार में ताकत है तो इस नियमावली को जनता के बीच ले कर जाए।





