झारखंड मुक्ति मोर्चा असम चुनाव में टी ट्राइब्स के सहारे तैयार करेगा अपनी राजनीतिक जमीन

Ranchi : झारखंड में सत्तासीन झामुमो का असम में चुनाव लड़ना कोई नया कदम नहीं है। झामुमो पहले भी असम में चुनाव लड़ चुकी है। लेकिन, 2026 के विधानसभा चुनाव में झामुमो का असम में चुनाव लड़ना एक महत्वपूर्ण फैसला है।

असम चुनाव के द्वारा जहां झामुमो को एक नए राज्य में अपनी पार्टी का विस्तार करने का अवसर मिल रहा है, वहीं इस चुनाव से पार्टी को असम में खाता खुलने की भी उम्मीद है। इससे पहले, झामुमो ने बिहार विधानसभा चुनाव में भी अपने गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस और राजद से सीटों की मांग की थी। लेकिन बिहार में कांग्रेस और राजद ने आपस में सीटों का बंटवारा कर लिया था। इसलिए असम के चुनाव में झामुमो गठबंधन के तालमेल से अलग हो खुद ही चुनाव के मैदान में उतर पड़ी है। झामुमो असम में कुल 21 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

गौरतलब बात है कि झामुमो असम में जिन सीटों पर चुनाव लड़ रही है, वे सभी सीटें टी ट्राइब्स बहुल क्षेत्र हैं। असम में टी ट्राइब्स का इतिहास करीब 170 वर्ष पुराना है। सन् 1850-60 में असम के टी गार्डन में वर्तमान झारखंड और छत्तीसगढ़ के लाखों आदिवासी मजदूरी करने गए और वहीं बस गए। आज असम में इनकी आबादी करीब 70 लाख के आसपास है।

असम के इन टी ट्राइब्स समुदाय का करीब 35 विधानसभा सीटों पर निर्णायक प्रभाव है। झामुमो ने असम में जिन विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, वे सभी सीटें टी ट्राइब्स बहुल क्षेत्र हैं। असम में डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, शिवसागर, जोरहाट, सोनितपुर, कोकराझार एवं उदलगिरी टी ट्राइब्स बहुल जिले हैं। इस बार झामुमो जिन 21 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में उनमें से कुल 17 सीटों पर बीजेपी विजयी रही थी। जबकि दो सीटों पर बोडो पीपुल्स फ्रंट ने जीत हासिल किया था। कांग्रेस और असम गण परिषद को यहां एक-एक सीटें मिली थीं।

पिछले चुनाव में बीजेपी को यहां भारी बढ़त मिलने के पीछे बीजेपी का टी ट्राइब्स को एसटी का दिलाने वायदा प्रमुख कारण था। लेकिन, बोडो और अन्य एसटी समुदायों के विरोध के कारण असम की बीजेपी सरकार अपने वायदे पर कागजी कार्रवाई से आगे नहीं बढ़ पायी। बीजेपी सरकार के इस वादाखिलाफ़ी की वजह से असम के नाराज टी ट्राइब्स के नेताओं ने 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र में झामुमो के सासंद विजय कुमार हांसदा, जोबा मांझी और नलिन सोरेन से दिल्ली में मुलाकात किया था।

इसी क्रम में 11 दिसंबर 2025 को असम टी ट्राइब्स का एक शिष्टमंडल झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रांची में मुलाकात किया था। माना जाता है कि इन्हीं मुलाकातों के समय असम के चुनाव में झामुमो के उतरने की रणनीति बनी।

हालांकि, जानकारों का कहना है कि असम में टी ट्राइब्स के बीच सरना धर्म कोड और ओलचिकी लिपि को लेकर काफी पहले से ही लोगों को एकजुट करने का काम जारी था। असम में करीब 78 फीसदी टी ट्राइब्स सरना धर्म मानने वाले हैं।

हेमंत सोरेन ने झारखंड में सरना धर्म कोड को लेकर जो कदम उठाया है उससे अन्य राज्यों के सरना धर्मावलंबी काफी उत्साहित हैं। वहीं माना जा रहा है कि असम के करीब 15 फीसदी ईसाई धर्मावलंबी टी ट्राइब्स भी झामुमो के साथ जा सकता है। यही वजह है कि असम में गठबंधन को लेकर कांग्रेस की चुप्पी भी मौन समर्थन माना जा रहा है।

फिलहाल झामुमो ने असम में जो चुनावी दांव खेला है, उसमें खोने को कुछ नहीं है। लेकिन पाने की उम्मीद और संभावनाएं कहीं ज्यादा है।

United Palamu

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