झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा की नई नियमावली से भोजपुरी और मगही भाषा गायब, शुरू हुआ जोरदार आंदोलन की तैयारी
Palamu : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटीईटी) की नई नियमावली से भोजपुरी और मगही भाषा को हटा दिए जाने के विरोध में जोरदार आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। इस बाबत पलामू के मेदिनीनगर कचहरी परिसर में रविवार दोपहर को झारखंड राज्य सहयोगी संघर्ष मोर्चा पलामू जिला ईकाई की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव एवं संचालन अनुज कुमार दुबे ने किया। बैठक में झारखंड राज्य सहयोगी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सह संघर्ष मोर्चा के राज्य सदस्य विनोद तिवारी उपस्थित हुए।

बिनोद तिवारी ने कहा कि मगही एवं भोजपुरी भाषा को टेट परीक्षा से हटा दिया गया है, इसे बचाने के लिए राजनीतिक पार्टी, समाजसेवी, छात्र संघ, शिक्षक संघ को एक मंच पर खड़ा होना होगा और सरकार को बताना होगा कि मगही भोजपुरी का आंदोलन जन आंदोलन का रूप लेगा, जो सरकार के लिए महंगा पड़ेगा। सुनील पाठक ने कहा कि सरकार हमारी भाषा को मिटाकर हमारे मान सम्मान, प्रतिष्ठा, अस्मिता को मिटाना चाहती है जिसे पलामू के लोग सफल नहीं होने देंगे।
जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि पलामू प्रमंडल के सभी नौ विधायकों एवं सभी पूर्व विधायक को मांग पत्र दिया जाएगा और उन्हें इस आंदोलन में शामिल होने के लिए कहा जाएगा।
इधर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के झारखंड प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए राज्य के साथ घोर विश्वासघात करार दिया।
प्रकाश टूटी ने रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह निर्णय भाषाई विभाजन को बढ़ावा देने वाला खतरनाक कदम है, जो राज्य को आंतरिक कलह और सामाजिक फूट की ओर धकेल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह फैसला क्षेत्रीय संतुलन और भाषाई विविधता के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि पलामू प्रमंडल सहित उत्तरी झारखंड के लाखों लोग भोजपुरी और मगही को अपनी मातृभाषा मानते हैं। ये भाषाएं न केवल दैनिक जीवन, बल्कि संस्कृति और शिक्षा से भी गहराई से जुड़ी हैं। इसके बावजूद सरकार द्वारा इन्हें नजरअंदाज करना यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों के लोगों की उपेक्षा की जा रही है।




