देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है मकर संक्रांति का पर्व

New Delhi : मकर संक्रांति का पर्व देश के कई हिस्सों में अलग-अलग रूपों में मनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में इसे पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। वहीं, तमिलनाडु में यह पोंगल के नाम से प्रसिद्ध है। गुजरात में इसे उत्तरायण कहा जाता है, जबकि पश्चिम उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। असम में इस पर्व को माघ बिहू के रूप में मनाया जाता है।

गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़

मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव का धनु से मकर राशि में प्रवेश करने के साथ गंगा में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पाप कटते हैं और तिलांजलि व दान करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है।कथा अनुसार, राजा सगर के पुत्रों को कपिल मुनि ने भस्म कर दिया था। उनके उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने माता पार्वती की कठिन तपस्या की, जिससे गंगा माता धरती पर अवतरित हुई। उनके स्पर्श से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ। यही कारण है कि गंगासागर में मकर संक्रांति पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं।

साल 2026 में शटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का दुर्लभ संयोग 23 वर्षों बाद बना है। इस विशेष योग को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। पटना के गंगा घाटों पर अहले सुबह से ही स्नान और दान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने और तिल का दान करने से भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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