
पलामू में कई ऐसे जगह है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं
पलामू में कई ऐसे जगह है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। इनमें प्रमुख है : कोयल रिवर फ्रंट, छतरपुर का बताने डैम, चैनपुर किला, रानीताल डैम, देवीधाम हैदरनगर, भीम चूल्हा मोहम्मदगंज, कचरवा डैम, मलय डैम, चिआंकी पहाड़ आदि।

मलय डैम : पलामू जिला के सतबरवा थाना क्षेत्र स्थित मलय किसी स्वर्ग से कम नहीं है. सतबरवा प्रखंड में स्थित यह डैम सात पहाड़ों की गोद में बसा एक अनोखा पर्यटन स्थल है, जहां की खुली वादियां और चारों ओर फैली हरियाली सैलानियों का मन मोह लेती है. यहाँ हर कदम पर प्रकृति अपने खूबसूरत रंग बिखेरती नज़र आती है और यही कारण है कि ठंड के मौसम में यह स्थान पर्यटकों की पहली पसंद बन जाता है.मलय डैम की सबसे बड़ी खासियत यहां की शांत झील और उसका अद्भुत नजारा है. ठंडी हवा के झोंकों के बीच पानी की हल्की लहरें मन को ऐसी शांति देती हैं, जिसकी तलाश अक्सर शहर की भीड़-भाड़ में खो जाती है. यहां नौका विहार का आनंद लेना पर्यटकों के लिए किसी खास अनुभव से कम नहीं है. पैंडल बोट से लेकर मोटर बोट तक, हर तरह की सुविधा यहां उपलब्ध है. नौका चालक सुनील कुमार बताते हैं कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटन विभाग ने तीन नए मोटर बोट और छह नए पैंडल बोट की व्यवस्था की है.पहले से भी कई मोटर और पैंडल बोट मौजूद हैं, जिनमें एक नाव में आठ लोगों के बैठने की सुविधा है. सुरक्षा के लिए सभी पर्यटकों को लाइफ जैकेट भी दिए जाते हैं.

भीमचुल्हा : मोहम्मदगंज थाना क्षेत्र स्थित कोयल बराज के निकट महाभारतकालीन ऐतिहासिक स्थल भीमचुल्हा एक ऐसा पर्यटक क्षेत्र है, जहां सैलानियों की चहल पहल सालो भर रहता है। हर दिन बाहर से कुछ न कुछ पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

साल के अंतिम दिनों और नए साल की शुरुआत में यहां सैलानियों का जमावड़ा अपने चरम पर पहुंच जाता है। वाच टावर से भीमबराज का विहंगम दृश्य, कोयल नदी में सूर्यास्त का प्रतिबिंब, पहाड़ी परिदृश्य तथा मंदिरों का धार्मिक माहौल लोगों को आकर्षित करता है। पर्यटक भगवान शिव, भीमबली, बजरंगबली के मंदिरों और पातालपुरी में पूजा- अर्चना करने के बाद कुंती और पांच पांडवों की प्रतिमाओं का दर्शन भी करते हैं। पिकनिक सीजन में भीमचुल्हा और आसपास के स्थल सैलानियों से भरे रहते हैं। मकर संक्रांति मेला भी यहां की लोकप्रियता में खास भूमिका निभाता है। कहा जाता है कि ये भीम चूल्हा भी लगभग 5 हजार साल पुराना है। मान्यता है कि कोयल नदी के तट पर शिलाखंडों से बलशाली भीम ने ही चूल्हा बनाने का काम किया था। भीम चूल्हा के पत्थरों पर आज भी पांडवों और माता कुंती के पैर के निशान मौजूद हैं, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते है।





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