सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, जपला में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, विद्यार्थियों ने लिया प्रकृति के संरक्षण का संकल्प
प्रकृति का संरक्षण ही मानवता की सुरक्षा का आधार : डॉ अंगद किशोर
Palamu : पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। प्रकृति का संतुलन बिगड़ने से मानव जीवन भी संकट में पड़ जाएगा। यह बातें इतिहासकार एवं अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापक अंगद किशोर ने मंगलवार को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, जपला में आयोजित पर्यावरण संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

कार्यक्रम का शुभारंभ अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य अरुण कुमार चौधरी, इतिहासकार डॉ अंगद किशोर एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य कुशजी पाण्डेय ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित एवं पुष्पार्चन कर किया। इसके उपरांत सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।
मुख्य वक्ता डॉ अंगद किशोर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पृथ्वी, जल, वायु, वन एवं वन्य जीवों को पूजनीय माना गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि आज बढ़ते प्रदूषण, अंधाधुंध वृक्षों की कटाई और जल स्रोतों के दोहन के कारण पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। इसे बचाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण के साथ-साथ उनकी सुरक्षा का भी संकल्प लेना होगा।
अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य अरुण कुमार चौधरी ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ समाज की पहचान है। यदि आज हम प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से जल संरक्षण, स्वच्छता और पौधरोपण को जीवन का नियमित हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य कुशजी पाण्डेय ने कहा कि विद्या भारती की शिक्षा पद्धति विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संस्कार विकसित करती है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही संभव है। प्रत्येक विद्यार्थी अपने जन्मदिन अथवा किसी विशेष अवसर पर एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, यही प्रकृति के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी।
कार्यक्रम में भैया-बहनों ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जल बचाओ, प्लास्टिक मुक्त भारत एवं वृक्षारोपण विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। अंत में सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अधिकाधिक पौधरोपण करने, जल एवं ऊर्जा का संरक्षण करने तथा स्वच्छ एवं हरित वातावरण बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी आचार्यगण, दीदीजी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।



