उदभट्ट विद्वान, मृदुभाषी और सरल स्वभाव के धनी थे प्रोफेसर सुभाषचन्द्र मिश्रा : प्रियरंजन पाठक
Palamu : सार्वभौम शकद्वीपीय ब्राह्मण महासभा पलामू के तत्वाधान में प्रोफेसर सुभाष चंद्र मिश्रा के निधन पर शोक सभा आयोजित की गई।
शोक सभा में पलामू जिला अध्यक्ष प्रोफेसर कृष्ण कुमार मिश्रा ने कहा की हम लोग एक साथ गणेश लाल अग्रवाल कॉलेज में पढ़ाया करते थे। उनका विचार अत्यंत सरल और स्वभाव उच्च कोटि का था। अब हमेशा मदद करने और समय पर सभी कार्य करने पर विश्वास करते थे। उनके निधन से शकदीपीय ब्राह्मण सहित शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

जिला प्रवक्ता मीडिया प्रभारी प्रिया रंजन पाठक ने कहा कि वह ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे, जिनकी चर्चा करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान होगा। वह अपने कार्य एवं दायित्व के प्रति पूर्ण समर्पण भाव से समर्पित थे। वे जब कॉलेज में पढ़ाया करते थे, तब समय से 30 मिनट पूर्व कॉलेज पहुंचना और समय के बाद जाना सभी क्लास समय पर लेना यह उनकी दिनचर्या थी और यह उनकी पहचान। वे घर में भी छात्रों को शिक्षा देते थे। परंतु उसके बदले में धनोपाजर्न की इच्छा नहीं रखते थे। यह उनकी समाज सेवा के प्रति गहरी लगाव को दर्शाता है।
जैसा कि मालूम है कि सुभाष का मतलब मिठास होता है वैसे ही उनका पूर्ण जीवन मिठास से भरा हुआ था। वाकई संस्थाओं के सचिव तो अध्यक्ष भी थे। झारखंड अदिविद्य परिषद के सदस्य भी थे और जेएस कॉलेज के संस्थापक सदस्य भी थे। हमारे अभिभावक के रूप में मार्गदर्शन किया करते थे और उनके साथ रहकर कार्य करने का जो अनुभव प्राप्त हुआ है वह अतुलनीय है। उनका विचार उनका व्यक्तित्व और शब्दों के साथ खेलने यानी कि शब्दों का जादूगर का सकते हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी ऐसे में उनका इस धरा धाम से जाना समाज के लिए शिक्षा जगत के लिए तथा व्यक्तिगत मेरे लिए भी अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
शोकसभा में दो मिनट का मौन रखा गया और प्रोफेसर सुभाष चंद्र मिश्रा को श्रद्धांजलि दी गई । ईश्वर से प्रार्थना की गई इस दुख की घड़ी में परिवार को दुख सहन करने की क्षमता प्रदान करें। शोकसभा में विनोद मिश्रा, अरुण मिश्रा, अनुज कुमार पाठक, अभय मिश्रा, घनश्याम पाठक, राजेंद्र कुमार मिश्रा, रामदत्त मिश्रा, उपेंद्र मिश्रा सहित कई लोग उपस्थित थे।




