अनुसूचित जाति-जनजाति की वास्तविक ऐतिहासिक पहचान और संस्कृति को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य : रमेश उरांव

लातेहार: रमेश उरांव ने कहा कि Supreme Court of India द्वारा दिया गया फैसला अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों की वास्तविक ऐतिहासिक पहचान और संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में सराहनीय कदम है।उन्होंने कहा कि यदि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोग अपनी पारंपरिक संस्कृति को छोड़कर किसी अन्य संस्कृति को अपनाते हैं, अर्थात धर्मांतरण करते हैं, तो ऐसी स्थिति में उन्हें मिलने वाले संवैधानिक संरक्षण समाप्त हो सकते हैं।उन्होंने आगे कहा कि इस स्थिति में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीट, नौकरी एवं व्यवसाय में मिलने वाले आरक्षण सहित अन्य संवैधानिक सुविधाएं प्रभावित होंगी।साथ ही SC/ST Act जैसे कानूनी संरक्षण से भी वे वंचित हो सकते हैं। इतना ही नहीं, वे अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ने के अधिकार से भी वंचित हो जाएंगे।श्री उरांव ने यह भी कहा कि पंखराज बाबा कार्तिक उरांव के सपनों के अनुरूप सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कई वर्ष पूर्व बाबा कार्तिक उरांव ने भी इस विषय को लेकर सदन में आवाज उठाई थी और यह मांग की थी कि धर्मांतरित जनजाति समाज को आरक्षण सहित अन्य सुविधाओं पर रोक लगाई जाए।

United Palamu

यूनाइटेड पलामू के डिजिटल टीम के द्वारा इस न्यूज़ को पूरी तरह से जांच परख कर तैयार किया गया है। उक्त टीम के द्वारा तथ्यों का गहन विश्लेषण करने के बाद न्यूज़ तैयार किया जाता है। न्यूज़ पोस्ट करने के पूर्व उसकी गहन समीक्षा की जाती है। तत्पश्चात न्यूज़ पोस्ट किया जाता है।
Back to top button
error: Content is protected !!