अमूल्य उपहार है जीवन, वज्रपात से लोग बचें : शिक्षक सतीश
Palamu : चैनपुर पनेरीबांध ऑक्सफोर्ड स्कूल के नजदीक टॉपर क्लासेस कोचिंग सेंटर के शिक्षक सतीश कुमार ने वज्रपात से हो रहे लोगो की मौत पर गहरा चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड की पठारी संरचना,घने जंगल और खनिज संपदा का होना, इसे वज्रपात का हॉटस्पॉट बनता है। इससे मरने वालों में अधिकांश ग्रामीण,किसान और आदिवासी समुदाय के लोग होते हैं जो खुले में काम कर रहे होते हैं।

उन्होंने कहा की हर साल वज्रपात (आकाशीय बिजली) से भारत में औसतन 2500 से 3000 लोगों की मौत हो जाती है। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली कुल मौतो में से लगभग 40% से 50% हिस्सेदारी केवल बिजली गिरने की घटनाओं की होती है, जो इसे देश में सबसे घातक प्राकृतिक आपदा बनाती है।
शिक्षक सतीश ने वज्रपात से सुरक्षित रहने के कुछ उपाय भी बताएं।
- घर के अंदर है तो पक्की छत के नीचे रहे। बिजली के उपकरणों टीवी या कंप्यूटर के तारों को न छुए। खिड़की दरवाजे और धातु के पाइप से दूर रहें।
- बाहर होने पर किसी बड़े पेड़ बिजली या मोबाइल टावर और ऊंचे खंभो के नीचे बिल्कुल शरल ना लें।
- 3. यदि आप नदी तालाब या किसी भी जल स्रोत के पास है तो तुरंत बाहर आ जाए।
- 4. उन्होंने यह भी बताया कि यदि आप खेतों या खुले मैदान में है तो अपने दोनों पैरों को आपस में सटाकर घुटनों को छाती से लगाकर और सर को दोनों हाथों के बीच झुककर अकडू बैठ जाएं।




