
आधुनिकता के दौर में भी गांवों में जीवंत है रामलीला की परंपरा : अविनाश देव
Palamu : सिनेमा और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बावजूद गांवों में रामलीला की परंपरा का जीवंत रहना भारतीय संस्कृति और लोक आस्था की मजबूती का प्रमाण है। उक्त बातें संत मरियम आवासीय विद्यालय के चेयरमैन एवं सामाजिक कार्यकर्ता अविनाश देव ने सदर प्रखंड के कुंडेलवा गांव में कहीं। वे आदर्श नवयुवक विकास संघ की ओर से मां काली पूजा महोत्सव के अवसर पर आयोजित रामलीला कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ उन्होंने देवी मंडप में पूजा-अर्चना और रामलीला मंच पर भगवान श्रीराम की आरती कर किया। आयोजन समिति की ओर से उनका स्वागत किया गया।

अपने संबोधन में अविनाश देव ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कार, नैतिकता और जीवन मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक समरसता की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने माता शबरी के प्रेम को स्वीकार कर सामाजिक समानता का संदेश दिया और पिता के वचन की मर्यादा रखने के लिए राजसुख का त्याग किया। उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा कि रामलीला जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। युवाओं को शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और शिक्षा सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता ओंकारनाथ तिवारी, शिक्षक प्रवीण दुबे तथा आयोजन समिति के अध्यक्ष बबलू सिंह, उपाध्यक्ष प्रदीप साहू, सचिव आनंद यादव, उप सचिव बबलू जी, कोषाध्यक्ष अविनाश प्रजापति, उप कोषाध्यक्ष बलराम सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।





