पलामू में भी आमरण अनशन ! आखिर कब जागेंगे शासन-प्रशासन के नुमाइंदे ?
Report : Amitesh Ranjan @ Palamu – Jharkhand
पूरे देश में छात्रों का आंदोलन चरम पर है। दिल्ली ! दिल्ली के बाद रांची !! और रांची के बाद पलामू!!! दिल्ली देश की राजधानी है और रांची झारखंड की राजधानी। इसलिए इन दोनों जगह की खबरों पर सरकार तुरंत संज्ञान ले रही है। लेकिन पलामू में भी आनंदोलन हो रहा है। और इस आंदोलन से शासन और प्रशासन मुंह मोड़ कर कुंभकर्णी निद्रा में है।
क्या न्याय की मांग करने वाले छात्रों की आवाज़ तभी सुनी जाएगी, जब कोई जान चली जाएगी?
पलामू में चतुर्थ वर्गीय नियुक्ति की मांग को लेकर हजारों अभ्यर्थियों का संघर्ष आज पांचवें दिन भी जारी है।

संघर्ष का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता सत्यनारायण शुक्ला पिछले चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। यह किसी पद, प्रतिष्ठा या व्यक्तिगत लाभ की लड़ाई नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत, संघर्ष और अपने परिवार की उम्मीदों के साथ इस दिन का इंतज़ार किया है।
बता दें कि।अभ्यर्थियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर पिछले दिनों एक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। हर जलती हुई मोमबत्ती एक अधूरे सपने का प्रतीक थी। लेकिन उसी दौरान लगातार भूखे रहने और शारीरिक कमजोरी के कारण सत्यनारायण शुक्ला अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। कुछ पल के लिए वहां मौजूद हर अभ्यर्थी की सांसें थम गईं। साथियों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार किया गया। इलाज के बाद भी उन्होंने आराम करने के बजाय आंदोलन स्थल पर लौटना उचित समझा और कहा “अगर मेरे कष्ट से हजारों युवाओं को न्याय मिलता है, तो यह संघर्ष जारी रहेगा।”
सबसे पीड़ादायक बात यह है कि आंदोलन के चार दिन बीत जाने के बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों का हाल जानने की आवश्यकता नहीं समझी। यह मौन केवल एक व्यक्ति की उपेक्षा नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की उम्मीदों की अनदेखी है, जो न्याय की आस लगाए बैठे हैं।

सत्यनारायण शुक्ला ने सरकार और प्रशासन से निवेदन किया है कि इस आंदोलन को केवल एक विरोध प्रदर्शन न समझें। इसके पीछे हजारों परिवारों के सपने, माता-पिता की उम्मीदें और युवाओं के वर्षों का परिश्रम जुड़ा हुआ है। समय रहते संवाद और समाधान ही सबसे उचित रास्ता है।
उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प स्पष्ट है, जब तक पलामू में चतुर्थ वर्गीय अभ्यर्थियों की न्यायोचित मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा।



