बेटे का शव लाने के लिए मां ने गिरवी रखा खेत, पांचवें दिन तेलंगाना से खूंटी पहुंचा पार्थिव शरीर
Ranchi : झारखंड के खूंटी जिला स्थित रनिया प्रखंड के बनई गांव से एक बेहद मार्मिक मामला सामने आया है। आर्थिक तंगी से जूझ रही एक मां को अपने 21 वर्षीय बेटे कर्मपाल सिंह का शव लगभग 1000 किलोमीटर दूर तेलंगाना से घर लाने के लिए फसल लगे खेत को 40 हजार रुपये में बंधक रखना पड़ा। इसके अलावा गांव में घर-घर जाकर किसी से 10 हजार, किसी से 20 हजार और किसी से 30 हजार रुपये उधार लेने पड़े। रोपनी के लिए बचाकर रखे 10 हजार रुपये भी शव लाने में खर्च हो गए। इन तमाम प्रयासों के बाद मौत के पांचवें दिन मां ललीता देवी अपने बेटे का अंतिम दर्शन कर सकीं।

गांव पहुंचते ही ललीता देवी बेटे के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी। उनके विलाप से पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। बाद में ग्रामीणों की मौजूदगी में कर्मपाल सिंह का अंतिम संस्कार पूरे रीति-रिवाज के साथ किया गया।
ललीता देवी ने बताया कि तेलंगाना से शव लाने में अब तक कुल 1.08 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। ललीता देवी और उनके पति कोका सिंह छोटे किसान हैं और शारीरिक रूप से खेती या मजदूरी करने में असमर्थ हैं। उनका बड़ा बेटा तीन वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश मजदूरी के लिए गया था, लेकिन तब से उसने परिवार की कोई आर्थिक मदद नहीं की और छोटे भाई की मौत की सूचना मिलने के बाद भी घर नहीं पहुंचा।
परिजनों के अनुसार कर्मपाल सिंह गोवा में मजदूरी करता था। कुछ दिनों से उसकी तबीयत खराब थी, इसलिए वह ट्रेन से घर लौट रहा था। उसके साथ यात्रा कर रहे मजदूर सुधीर गोप ने बताया कि 31 जुलाई की रात तेलंगाना के वारंगल स्टेशन के पास कर्मपाल की हालत अचानक बिगड़ गई। रेलवे पुलिस की सहायता से उसे एमजीएम वोकेशनल एंड बीवी पैरामेडिकल कॉलेज, कोठवाड़ा (वारंगल) में भर्ती कराया गया, जहां एक अगस्त की सुबह करीब तीन बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मौत की सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार ने सरकार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से शव घर लाने में सहायता की अपील की थी। मामले की जानकारी तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया को भी दी गई थी, जिन्होंने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया था।




