राज्यपाल सह कुलाधिपति के दरबार में पहुंचा NPU की वित्तीय अनियमितताओं का मामला
* APSU-NSUI के 11 सूत्री ज्ञापन पर कुलाधिपति सख्त, दोषियों पर कार्रवाई और प्रशासनिक अधिकार रोकने का निर्देश
* कुलपति को तत्काल शो-कॉज का आदेश, IPS की स्थापना व संचालन की भी होगी जांच
Ranchi-Palamu : नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर चल रहे आपसू-NSUI के “किल करप्शन–क्लीन कैंपस” अभियान ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। एक दिन पहले 11 सूत्री मांगों को लेकर कुलाधिपति को ज्ञापन सौंपने के बाद बुधवार को आपसू और NSUI के प्रतिनिधिमंडल को राजभवन में मुलाकात के लिए बुलाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष अंकेक्षण में सामने आए बिंदुओं और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक-प्रशासनिक स्थिति को कुलाधिपति के समक्ष विस्तार से रखा।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार,कुलाधिपति ने वित्तीय अनियमितताओं के मामले में संबंधित दोषियों पर कार्रवाई तथा उनके प्रशासनिक अधिकार सीमित/निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश कुमार सिंह को तत्काल शो-कॉज करने का आदेश दिया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि Institute of Professional Studies (IPS) की स्थापना एवं संचालन की जांच होगी, आइपीएस रद्द करने की बात कुलाधिपति की ओर से कही गई है।

विशेष अंकेक्षण रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार
आपसू-NSUI की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में राज्यपाल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव के पत्रांक 3227, दिनांक 04.12.2025 का हवाला देते हुए कहा गया है कि उसके आलोक में नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति के कार्यकाल का विशेष अंकेक्षण झारखंड सरकार के वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय द्वारा कराया गया।
ज्ञापन में विशेष अंकेक्षण में सामने आए वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताओं तथा वसूली योग्य राशि की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। प्रतिनिधिमंडल ने कुलाधिपति से कहा कि मामला केवल विश्वविद्यालय के आंतरिक प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन और विद्यार्थियों के हित से जुड़ा हुआ है।
11 सूत्री मांगों ने खोली कार्रवाई की राह
- विशेष अंकेक्षण रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई
रिपोर्ट में दर्ज प्रत्येक वित्तीय अनियमितता, वसूली योग्य राशि और आपत्ति की बिंदुवार जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग।
- संबंधित पदाधिकारियों की जवाबदेही तय हो
जिन पदाधिकारियों, कर्मचारियों अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध या जिम्मेदार पाई गई है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग।
- प्राथमिक साक्ष्यों की सुरक्षा और प्राथमिकी
गंभीर वित्तीय मामलों में यदि सरकारी राशि के दुरुपयोग अथवा आपराधिक कृत्य के प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिलते हैं तो नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज करने तथा मूल अभिलेख, नोटशीट, बिल-वाउचर, क्रय एवं भुगतान संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखने की मांग।
- CBI/CID अथवा स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच
मामले की गंभीरता और कथित वित्तीय अनियमितताओं के व्यापक स्वरूप को देखते हुए सक्षम उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग।
- प्रवेश, परीक्षा और परिणाम व्यवस्था में सुधार
प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा संचालन, परिणाम प्रकाशन, अंकपत्र निर्माण और शैक्षणिक कैलेंडर में हो रही देरी समाप्त करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने की मांग।
- वर्तमान कार्यकाल की खरीद एवं वित्तीय व्यय का विशेष अंकेक्षण
ज्ञापन में वर्तमान कुलपति के कार्यकाल से संबंधित खरीद एवं वित्तीय मामलों की विशेष जांच की मांग की गई है। दस्तावेज में अवधि को लेकर विशेष अंकेक्षण रिपोर्ट का उल्लेख भी किया गया है।
- शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की कमी दूर हो
NEP लागू होने के बाद कई महाविद्यालयों में इंटरमीडिएट इकाइयों के बंद होने से उत्पन्न शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की कमी दूर करने तथा अनुभवी मानव संसाधन उपलब्ध कराने की मांग।
- गलत एवं अनियमित भुगतान की वसूली
विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा गलत तरीके से किए गए भुगतान की राशि को ब्याज सहित वापस विश्वविद्यालय के खाते में जमा कराने की मांग।
- सभी महाविद्यालयों में NCC एवं NSS का संचालन
विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए सभी महाविद्यालयों में NCC एवं NSS जैसी गतिविधियों को सुनिश्चित करने की मांग।
- Institute of Professional Studies की जांच
ज्ञापन में IPS की स्थापना एवं संचालन किस सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से हुआ, इसकी जांच के साथ-साथ निदेशक पद की नियुक्ति, चयन प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग की गई है। दस्तावेज में सेवानिवृत्त शिक्षक को निदेशक बनाए जाने के बावजूद बाद में की गई नियुक्ति की पात्रता और प्रक्रिया की जांच की मांग भी उठाई गई है।
- ₹5.92 करोड़ अनुदान और 10% कमीशन के आरोप की जांच
ज्ञापन में सरकार द्वारा मार्च माह में उपलब्ध कराए गए **₹5,92,80,000 (लगभग ₹5.92 करोड़) के महाविद्यालय अनुदान के बावजूद राशि उपलब्ध नहीं कराने के कारणों की जांच तथा कुलपति पर कथित 10 प्रतिशत कमीशन मांगने के आरोप की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
दोषियों पर कार्रवाई तक अभियान जारी रहेगा
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कुलाधिपति के समक्ष विश्वविद्यालय में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और विद्यार्थियों के हित से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष अंकेक्षण में सामने आए मामलों में केवल कागजी कार्रवाई के बजाय जिम्मेदारी तय कर वसूली और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि विशेष अंकेक्षण में किसी व्यक्ति की वित्तीय अनियमितता में भूमिका प्रमाणित होती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए और विश्वविद्यालय की वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
कुलाधिपति के निर्देश के बाद बढ़ी हलचल
कुलाधिपति की ओर से कुलपति को शो-कॉज और संबंधित मामलों में कार्रवाई के निर्देश की बात सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि शो-कॉज का जवाब क्या आता है और विशेष अंकेक्षण में दर्ज आपत्तियों पर विश्वविद्यालय प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है।
APSU और NSUI ने बताया बड़ी उपलब्धि
आपसू और NSUI ने इसे अपनी मुहिम की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय में वित्तीय जवाबदेही और शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार तक उनका अभियान जारी रहेगा।
इनकी रही उपस्थिति
मौके पर आपसू नेता राहुल कुमार दुबे, कमलेश कुमार पाण्डेय,राज नेहा चौबे, प्रिया प्रजापति कांग्रेस जिला महासचिव अभिषेक तिवारी , एनएसयूआई प्रदेश अमरनाथ तिवारी मौजूद थे।



