
चंदवा-लोहरदगा सड़क पर ट्रकों की कतार से जनता परेशान, सौरव ने उठाई आवाज
Latehar: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता सौरव श्रीवास्तव ने आज एक प्रेस बयान जारी करते हुए हिंडाल्को इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को कड़ी चेतावनी दी है।
सौरव श्रीवास्तव ने कहा कि वे एक अत्यंत महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे की ओर सरकार, प्रशासन और आम जनता का ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं।उन्होंने कहा कि चंदवा और लोहरदगा के बीच यात्रा करने के दौरान चापी के पास हेसल स्थित हिंडाल्को के बड़े साइडिंग क्षेत्र में अक्सर कंपनी द्वारा ट्रकों की लंबी कतार सड़क पर खड़ी कर दी जाती है। इससे न केवल आम लोगों का आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित होता है, बल्कि कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। लोगों को चंदवा और लोहरदगा के बीच यात्रा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह सर्वविदित तथ्य है कि कोई भी व्यक्ति या कंपनी सार्वजनिक संसाधनों एवं अधोसंरचना का उपयोग अपने निजी हित के लिए नहीं कर सकती, इसके बावजूद हिंदाल्को द्वारा अपने निजी मुनाफे और स्वार्थ के लिए सड़क जाम कर सैकड़ों वाहनों को पार्क करना तथा आम जनजीवन को बाधित करना किसी अपराध से कम नहीं है।
सौरव ने आरोप लगाया कि हिंडाल्को की कार्यशैली वर्षों से इस क्षेत्र के प्रति उपेक्षापूर्ण रही है। बॉक्साइट खनन करने वाली यह कंपनी लंबे समय से इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही है, लेकिन स्थानीय विकास के लिए कोई ठोस योगदान नहीं दिया गया।
हिंडाल्को के खनन कार्य से मुख्य रूप से लातेहार, लोहरदगा और गुमला जिले प्रभावित होते हैं। खनन एक क्षेत्र में, परिवहन दूसरे क्षेत्रों में तथा चापी और टोरी के माध्यम से रेलवे द्वारा बॉक्साइट की ढुलाई की जाती है। इसके बावजूद CSR गतिविधियों और अन्य विकास कार्यों के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि चंदवा रेलवे स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज का निर्माण अत्यंत आवश्यक है, लेकिन हिंडाल्को द्वारा उस कार्य में भी बाधा उत्पन्न की गई और निजी क्षेत्र होने का हवाला दिया गया।
सौरभ ने सवाल उठाया कि यदि कंपनी अपने क्षेत्र को निजी बताकर सार्वजनिक सुविधा परियोजनाओं को रोक सकती है, तो फिर चंदवा और लोहरदगा के बीच की सार्वजनिक सड़क का निजी उपयोग किस आधार पर किया जा रहा है?
सौरव श्रीवास्तव ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने झारखंड सरकार, उद्योग मंत्रालय तथा हिंडाल्को प्रबंधन को पत्र लिखकर तीन दिनों का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो वे आगे की आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
उन्होंने कहा कि आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर इस अव्यवस्था को तत्काल रोकने और हिंडाल्को के कार्यों पर रोक लगाने की मांग की जाएगी। यदि इसके बावजूद समाधान नहीं निकला, तो जनता को संगठित कर हिंडालको के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।





