
गुरु पूर्णिमा पर गुरु परंपरा का हुआ भावपूर्ण स्मरण

गुरु के आशीर्वाद से बौद्धिक विकास होता है : राजीव रंजन पांडे
Latehar : सरस्वती विद्या मंदिर, धर्मपुर पथ, लातेहार में दिन बुधवार को महर्षि वेदव्यास जयंती के पावन अवसर पर गुरु पूर्णिमा श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, महर्षि वेदव्यास के चित्र पर पुष्पार्चन तथा सामूहिक रूप से गुरु स्तुति—
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥”
—के सस्वर गायन के साथ हुआ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के सचिव राजीव रंजन पांडे ने कहा कि गुरु के आशीर्वाद से ही मनुष्य का बौद्धिक, नैतिक एवं चारित्रिक विकास होता है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा और उद्देश्य भी प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर भैया-बहनों ने आकर्षक संस्कृत झांकी प्रस्तुत की, जिसमें चारों वेदों के संकलन का सजीव चित्रण किया गया। झांकी के माध्यम से यह भी दर्शाया गया कि महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत का लेखन भगवान श्रीगणेश ने किया था। विद्यार्थियों की इस प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में विद्यार्थियों ने कविता, गीत, नाटक, भाषण, कहानी एवं समूहगान के माध्यम से गुरु की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। छोटे-छोटे भैया-बहनों द्वारा प्रस्तुत गुरु वंदना एवं समूहगीत विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। अनेक विद्यार्थियों ने गुरु के महत्व पर प्रभावशाली वक्तव्य एवं सस्वर वाचन प्रस्तुत कर भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का गौरवपूर्ण स्मरण कराया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य उत्तम कुमार मुखर्जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व हमें अपने जीवन में गुरु के महत्व को समझने तथा उनके प्रति श्रद्धा, सम्मान और आभार व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। गुरु के मार्गदर्शन से ही ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व का समग्र विकास संभव है।”
कार्यक्रम के अंत में सभी ने महर्षि वेदव्यास को नमन करते हुए भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर विद्यालय के सभी आचार्य, दीदीजी, कर्मचारीगण एवं भैया-बहनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।



