हुसैनाबाद में जुलूस-ए-अमारी सह अय्याम-ए-अज़ा का आखिरी दिन ग़मगीन माहौल में मनाया गया
Palamu : हुसैनाबाद में जुलूस-ए-अमारी सह अय्याम-ए-अज़ा का आखिरी दिन बेहद ग़मगीन और पुरसोज़ माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर मजलिस-ए-अज़ा और नौहाख्वानी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मोमनीन ने शिरकत की।

कार्यक्रम की शुरुआत मरहूम सैयद ज़ाकिर हुसैन साहब के अज़ाख़ाने में आयोजित मजलिस-ए-अज़ा से हुई। मजलिस को आलिजनाब मौलाना सैयद वसी असगर ज़ैदी (पाशा) साहब ने ख़िताब फ़रमाया। मजलिस के बाद मशहूर नौहाख्वान सैयद शबीह अब्बास अर्फ़ी ने अपनी पुरदर्द आवाज़ में नौहाख्वानी पेश की, जिसे सुनकर अज़ादारों की आँखें नम हो गईं।
इसके बाद दूसरी मजलिस को आलिजनाब मौलाना सैयद अली सजीर रिज़वी साहब ने ख़िताब फ़रमाया। मजलिस के बाद जुलूस-ए-अज़ा निकाला गया, जो मुख्य मार्ग से होते हुए गांधी चौक पहुँचा। गांधी चौक पर आलिजनाब मौलाना सैयद एहसान अब्बास साहब ने तक़रीर फ़रमाई और अज़ादारों को कर्बला के पैग़ाम, शहादत और सब्र की अहमियत से रूबरू कराया।
इसके बाद जुलूस-ए-अज़ा अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए सदर इमामबाड़ा पहुँचा। सदर इमामबाड़ा में मौलाना साबिर रज़ा साबिर साहब ने मजलिस को ख़िताब फ़रमाया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान अज़ादारों में कर्बला के शहीदों की याद में ग़म और मातम का माहौल रहा। जुलूस में शामिल लोगों ने अनुशासन और पुरसोज़ अंदाज़ में अज़ादारी के इस सिलसिले को आगे बढ़ाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मोमनीन एवं अज़ादार मौजूद रहे।
इस प्रोग्राम का इहतेमाम मोमेनिं हुसैनाबाद कि जानिब से किया गया। अंजुमन अकबरिया, अंजुमन अब्बासिया, अंजुमन फ़रोग ए अज़ा के अलावा हैदर नगर, झारगडा, मांडर, रोहतास के मोमेनी ने शिरकत किया। सभी ने नाम आंखों से अपने वक़्त के इमाम को श्रद्धांजलि पेश किया।




