वैश्विक व्यवधान के बावजूद भारत की 7.8 फीसदी ग्रोथ शानदार: सीतारमण
New Delhi : केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि दुनियाभर में आई मुश्किलों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की (अप्रैल-जून) पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की “शानदार ग्रोथ” दर्ज की है। इसके साथ ही तमाम चुनौतियों के बावजूद यह दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बनी हुई है।
वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में बताया कि केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को न्यूयॉर्क में बैंक ऑफ़ अमेरिका के साथ मिलकर भारत के महावाणिज्य दूतावास के द्वारा आयोजित एक उच्च-स्तरीय व्यावसायिक गोलमेज बैठक में निवेशकों को संबोधित करते हुए यह बात कही।

निर्मला सीतारमण ने निवेशकों से कहा, “दुनियाभर में आई मुश्किलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 फीसदी की शानदार विकास दर दर्ज की है।
सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सुधारों पर जोर देते हुए भारत ने कई सुधारों (जैसे इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) के जरिए रेगुलेटरी निश्चितता भी प्रदान की है। ऐसे सुधारों से नियमों का पालन करना आसान हुआ है और कागजी काम कम हुआ है। उन्होंने बताया कि एक दशक से ज्यादा समय पहले सत्ता में आने के बाद से ही भारत सरकार का यह मुख्य फोकस रहा है।
वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार ने जिन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है, उनमें शामिल हैं: कैपिटल एसेट्स का निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (खासकर एविएशन) के ज़रिए इंडस्ट्री को लगातार समर्थन देना; निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना, एआई और डेटा सेंटर्स के विकास को बढ़ावा देना; ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को समर्थन देना, एमएसएमई को क्रेडिट की उपलब्धता सुनिश्चित करना और बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) को कम करना। उन्होंने कहा कि इन उपायों से बैंकों और इंडस्ट्री के फलने-फूलने, बढ़ने और मजबूत होने के लिए बेहतर बिजनेस माहौल बनाने में मदद मिली है।
सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 के आने के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने लगातार आ रही चुनौतियों के बावजूद भारत पिछले कई वर्षों से फिस्कल प्रूडेंस (वित्तीय समझदारी) और फिस्कल डिसिप्लिन (वित्तीय अनुशासन) के रास्ते पर चलने के लिए लगातार प्रतिबद्ध रहा है।




