यूजीसी के नए नियमों पर देश भर में बवाल, पलामू के पाटन में 31 को सवर्ण समाज का आक्रोश रैली

Palamu : यूजीसी के नए नियम को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग पूरे देश में स्वर्ण समाज के द्वारा की जा रही है.स्वर्ण समाज का आरोप है कि यह प्रावधान उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है और इससे कुछ समूहों को शिक्षा से बाहर किया जा सकता है.पूरे देश का सवर्ण समाज गुस्से में है. देश में प्रखंड स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन का दौर शुरू हो चुका है. इसी कड़ी में पाटन (पलामू) में भी 31 जनवरी दिन शनिवार को उच्च विद्यालय के मैदान में स्वर्ण समाज के तत्वाधान में आक्रोश रैली का आयोजन किया गया है. इस रैली में ज्यादा से ज्यादा स्वर्ण समाज के लोगों को पहुंचने की अपील की गई है।

क्यों हो रहा है विरोध ?

विरोध करने वाले संगठनों का तर्क है कि इस नियम का दुरुपयोग हो सकता है। इसके जरिए अगड़ी जातियों के छात्रों और शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है। जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर विरोध के लिए ‘सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)’ का गठन किया है। ताकि इस रेगुलेशन के खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सके।

13 जनवरी को यूजीसी ने लागू किया नया नियम

13 जनवरी 2026 को यूजीसी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनिमय 2026 जारी किया। जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थाओं में समानता को बढ़ाना है। ताकि किसी भी वर्ग के छात्र, छात्राओं के साथ भेदभाव को रोका जा सके. इसका उद्वेश्य है :
जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, जन्मस्थान या दिव्यांगता के आधार पर कोई अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यवहार, जो शिक्षा में समानता में बाधा डालता है या मानव की गरिमा का उल्लंघन करता है, उसे जातिगत भेदभाव माना जाएगा.जातिगत भेदभाव की परिभाषा में अब एससी-एसटी के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग छात्र भी शामिल किए गए हैं.

यूजीसी का क्या कहना है ?

इन नियमों को लागू करने के पीछे यूजीसी की तरफ से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मकसद को पूरा करना है। यह नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस दृष्टिकोण पर आधारित है जो ‘पूर्ण समता और समावेशन’ को सभी शैक्षिक निर्णयों की आधारशिला मानता है। यूजीसी का कहना है कि इन नियमों से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि वंचित छात्र शिक्षा प्रणाली में बिना किसी डर के बेहतर प्रदर्शन कर सकें। इन नियमों का प्राथमिक उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति , सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव को खत्म करना है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा ?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को इस पूरे मामले पर सवर्ण समाज की उन सभी आशंकाओं को भी दूर करने की कोशिश की, जिसमें वह रेगुलेशन के दुरुपयोग की आशंका जता रहा है। साथ ही यह भरोसा भी दिया कि नए कानून का किसी भी वर्ग के खिलाफ गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा- मैं विनम्रता से सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी का उत्पीड़न या कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। इसमें चाहे यूजीसी हो, केंद्र हो या राज्य सरकार, यह उनका दायित्व होगा। जो कुछ भी व्यवस्था होगी, वह संविधान की परिधि के अंदर होगी। जो विषय आया है, उसकी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में व्यवस्था की गई है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

एडवोकेट विनीत जिंदल ने इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है। याचिका में विनियम 3(सी) को चुनौती दी गई है। 3 (सी) में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा की गई है। इसमें अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के साथ केवल जाति के आधार पर भेदभाव को परिभाषित किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह परिभाषा “गैर-समावेशी” है।याचिकाकर्ता, अधिवक्ता विनीत जिंदल का कहना है कि यह प्रावधान, गैर-अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों को शिकायत निवारण और संस्थागत संरक्षण से वंचित करता है। यह भी दावा किया गया है कि यह प्रस्ताव संविधान के तहत दिए गए कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 21 शामिल हैं। अनुच्छेद 14 सभी को “कानून के समक्ष समानता” और “कानूनों का समान संरक्षण” की गारंटी देता है।अनुच्छेद 15(1) धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार। याचिकाकर्ता ने सरकार और यूजीसी से यह मांग की है कि विनियमों के तहत समान अवसर केंद्र, समता हेल्पलाइन, जांच तंत्र, विनियमन 3 (सी) पर उचित पुनर्विचार के साथ सभी को बिना किसी भेदभाव के लिए सभी के लिए लागू करें।

United Palamu

यूनाइटेड पलामू के डिजिटल टीम के द्वारा इस न्यूज़ को पूरी तरह से जांच परख कर तैयार किया गया है। उक्त टीम के द्वारा तथ्यों का गहन विश्लेषण करने के बाद न्यूज़ तैयार किया जाता है। न्यूज़ पोस्ट करने के पूर्व उसकी गहन समीक्षा की जाती है। तत्पश्चात न्यूज़ पोस्ट किया जाता है।

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