Sarhul Mahotsav Palamu : सरहुल पर्व के दौरान निकला जुलूस, सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रही पलामू पुलिस
Palamu : पलामू जिले में शनिवार को जनजातीय समाज ने हर्षोल्लास के साथ प्रकृति पर्व सरहुल श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया। शहर से लेकर गांव तक जनजातीय समाज दिनभर सरहुल की खुशी में झुमता रहा। मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में आधा दर्जन स्थल पर पूजा के बाद जिला स्कूल के मैदान में सरहुल जुलूस का महाजुटान हुआ।
इस महाजुटान में ग्रामीण क्षेत्र से भी जनजातीय समाज के लोग सरना स्थल पर पूजा करने के बाद शोभायात्रा निकालकर पारंपरिक झंडे और अन्य प्रतीक के साथ मेदिनीनगर के महाजुटान में शामिल हुए। शोभायात्रा मेदिनीनगर सिटी के छहमुहान पहुंचने पर जय सरना के जयघोष, जनजातीय गीत से वातावरण गूंज उठा। केवल जनजातीय समाज की मस्ती चौतरफा दिख रही थी करीब एक घंटे तक यह स्थिति रही।

जय सरना, जय चाला के जयघोष से पूरा मार्ग भी गूंजता रहा। अदि कुरुख सरना समाज ने महाजुटान में सरहुल पूजा को प्राकृतिक पर्व के रूप में मनाने का संकल्प लिया।
जिला स्कूल के महाजुटान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदि कुरुख सरना समिति के जिला संयोजक श्यामलाल उरांव ने कहा कि सरहुल पूजा धरती और सूर्य के शादी का दिन है और सभी आदिवासी जुलूस के रूप में बाराती होते हैं। पूर्वजों को चैत्र महीना के तृतीय तिथि को अध्यात्म जान मिला था कि दुनिया में जाकर सबका कल्याण करे। सरहुल प्रकृति से जुड़ा त्यौहार है। आदिवासी प्रकृति का सबसे नजदीक है। इसका प्रमाण धरती सूर्य का चक्कर दाहिने से बाए लगता है ठीक इसी तरह आदिवासी भी अखड़ा में दाएं से बाए की ओर परिक्रमा करता है।
सरहुल संकल्प लेने का पर्व है। दुनिया पेड़ लगाने की बात करता है लेकिन आदिवासी समाज पेड़ बचाने का काम करता है। इसकी पूजा करता है। पर्यावरण का संरक्षक आदिवासी है। इसलिए आदिवासी जल जमीन और जंगल की मांग करता है। सरहुल पूजा वृक्ष दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। जरूरत पेड़ लगाओ अभियान की नहीं बल्कि पेड़ बचाव अभियान की है। आदिवासी इसके वैज्ञानिक है। कौन सा पेड़ कब और कहां लगेगा इसकी जानकारी आदिवासी को है।
भारत के लिए पर्यावरण दिवस पांच जून नहीं बल्कि चैत्र महीना के शुक्ल पक्ष के तृतीय तिथि को मनाना चाहिए। इस दिन वृक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। अगले साल से सरकार राजकीय मान्यता दे अन्यथा अदि कुरुख सरना समिति इसे पर्यावरण दिवस के रूप में मनाएगा।उन्होंने बताया कि सरहुल दो शब्दों से मिलकर बना है सर का अर्थ सरना और हुल का अर्थ होता है क्रांति। क्रांति केवल लड़ाई नहीं है क्रांति का अर्थ है अपने अंदर छुपे हुए बुराई से लड़ना, अशिक्षा के विरुद्ध लड़ना।
इस दौरान जिला स्कूल प्रांगण में भंडारिया, छतरपुर, पिपरा, कामत, हुसैनाबाद, मनातू, पाटन, तरहसी, लेस्लीगंज, पचरुखी आदि जगहों से सरना समाज के लोग जुलूस लेकर पहुंचे थे।
सरहुल जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने को लेकर शहर थाना प्रभारी ज्योति लाल रजवार,एसआई संगीता झा,टीओपी वन प्रभारी इंद्रदेव पासवान, ट्रैफिक प्रभारी सत्येंद्र दुबे, टाइगर मोबाइल के जवान राकेश कुमार सिंह, रोहित कुमार,अनिल कुमार पासवान,सहायक पुलिस के जवान शीतल प्रजापति हरेंद्र कुमार, धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य पुलिस पदाधिकारी व जवान उपस्थित थे।



