नाबालिक की दुष्कर्म व हत्या मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, डीजीपी और गृह सचिव से मांगा जवाब
Ranchi : हजारीबाग में दुष्कर्म के बाद नाबालिक की हत्या पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख स्वतः संज्ञान लिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने इसे निर्भया जैसी क्रूरता बताते हुए राज्य के डीजीपी और गृह सचिव से जवाब मांगा है। रामनवमी जुलूस के दौरान लापता हुई बच्ची का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला था। कोर्ट ने घटना के कई दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर चिंता जताई और पुलिस को पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने का निर्देश दिया।

अधिवक्ता ने क्या कहा ?
अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में दर्ज किया हैं। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के डीजीपी, गृह सचिव और हजारीबाग के एसएसपी को इस मामले में पार्टी बनाया है।
आरोपियों के गिरफ्तारी न होने पर कोर्ट ने जताई चिंता
अदालत ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी पर गहरी चिंता जताई। साथ ही राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। अदालत ने हजारीबाग एसपी को त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया हैं।
पीड़िता के परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश
अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पीड़िता के परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराएं।पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। पुलिस ने फोरेंसिक टीम के साथ ही डॉग स्क्वॉड की मदद से वारदात की जगह से सबूत जुटाए हैं। डीजीपी के निर्देश पर मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है। पुलिस ने अदालत को भरोसा दिया कि वह जल्द ही वारदात को अंजाम देने वालों तक पहुंच जाएगी। हालांकि अदालत अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर चिंता जताई।




