Palamu : विकासशील इंसान पार्टी ने सिकंदर चौधरी के हत्या के विरोध में किया धरना प्रदर्शन
Palamu : विकाशशील इंसान पार्टी ने सिकंदर चौधरी के हत्या के विरोध में कचहरी परिसर में धरना प्रदर्शन किया।धरना प्रदर्शन के दौरान विकाशशील इंसान पार्टी के नेताओ ने कहा की प्रशासनिक विफलता की उच्चस्तरीय जांच, शेष नामजद अभियुक्तों की अविलंब गिरफ्तारी, अनुसंधान में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, दोषी पुलिस पदाधिकारियों पर कठोर कार्रवाई, पीड़ित परिवार के पनर्वास एवं त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए।
विकाशशील इंसान पार्टी के नेताओ ने कहा की रामपुर निवासी स्वर्गीय सिकंदर चौधरी के जघन्य हत्याकांड में निष्पक्ष न्याय, प्रशासनिक जवाबदेही तथा विधि के शासन की स्थापना सुनिश्चित कराना है। आप अवगत हैं कि दिनांक 23 मई 2026 को रामपुर में घटित घटना केवल स्वर्गीय सिकंदर चौधरी की हत्या तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह एक सुनियोजित एवं व्यापक हिंसक हमला था। इस हमले में न केवल स्वर्गीय सिकंदर चौधरी की निर्मम हत्या कर दी गई, बल्कि अनेक निदर्दोष ग्रामीणों पर जानलेवा हमला किया गया। इस घटना में नाबालिग जसवंत चौधरी को गोली लगी, संजय चौधरी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए। इसके अतिरिक्त मृतक के पिता मधु चौधरी, सिकंदर चौधरी (पिता-स्वर्गीय ईश्वर चौधरी), उदय चौधरी को लाठी डंडा, लोहे की रॉड से गंभीर चोटें आईं।

सौभाग्यवश समय पर उपचार मिलने से उनकी जान बच सकी, अन्यथा यह घटना और भी बड़े जनसंहार का रूप ले सकती थी। यह घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरे परिवार एवं समुदाय को भयभीत करने के उद्देश्य से किया गया संगठित हिंसक हमला था।उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि यदि जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा समय रहते प्रभावी एवं विधिसम्मत कार्रवाई की गई होती, तो इस जघन्य घटना को रोका जा सकता था।
अतः घटना को रोकने में हुई प्रशासनिक विफलता की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जानी चाहिए। घटना के काफी समय बीत जाने के बावजूद आज भी 14 नामजद अभियुक्त पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिससे पीड़ित परिवार एवं प्रत्यक्षदर्शी गवाह भय और असुरक्षा के वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। यह स्थिति कानून-व्यवस्था एवं अनुसंधान की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। इसके अतिरिक्त, पीड़ित परिवार को न्यायालय से प्राप्त केस डायरी की प्रति के अध्ययन के बाद अनुसंधान प्रक्रिया में अत्यंत गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आई है।

केस डायरी से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के मूल बयानों को उनके वास्तविक स्वरूप में दर्ज करने के बजाय उन्हें परिवर्तित एवं तोड़-मरोड़कर इस प्रकार अंकित किया गया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों को अप्रत्यक्ष (श्रुत) साक्षी के रूप में प्रदर्शित कर दिया गया। यदि निष्पक्ष जांच में यह तथ्य सत्य पाया जाता है, तो यह निष्पक्ष अनुसंधान के सिद्धांतों के विपरीत होने के माथ-माथ अभियुक्तों को अनुचित लाभ पहुंचाने की गंभीर आशंका उत्पन्न करता है। पीड़ित परिवार द्वारा न्यायालय से केस डायरी की प्रति प्राप्त होने के उपरांत इन कथित अनियमितताओं की लिखित सूचना पुलिस अधीक्षक, पलामू एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक, पलामू प्रक्षेत्र को भी दी जा चुकी है। इसके बावजूद यदि अब तक कोई प्रभावी जांच या सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, तो यह अत्यंत गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय है।
उपरोक्त तथ्यों के आलीक में यह स्पष्ट है कि इस पूरे प्रकरण में केवल अपराधियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, अनुसंधान की निष्पक्षता तथा पीड़ित परिवार के सम्मानजनक पुनर्वास को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।



