
Palamu में धूमधाम से मना डॉ. रत्नप्पा कुम्हार की जयंती, बोले अविनाश देव : नई पीढ़ी को पढ़ाया जाए पद्मश्री रत्नप्पा की जीवनी
मेदिनीनगर : जिस समाज की मेहनत से देश की संस्कृति और सभ्यता सदियों से आकार लेती रही, उसी कुम्हार समाज से निकलकर राष्ट्र निर्माण की सर्वोच्च संस्थाओं तक पहुंचने वाले संविधान सभा के सदस्य, स्वतंत्रता सेनानी, सहकारिता आंदोलन के प्रणेता और पद्मश्री डॉ. रत्नप्पा भारमप्पा कुम्हार की जयंती पर मंगलवार को मेदिनीनगर में उनके योगदान को याद किया गया।

15 सितंबर को डॉ. रत्नप्पा कुम्हार की जयंती के अवसर पर झारखंड माटी कला बोर्ड के प्रमंडलीय कार्यालय, मेदिनीनगर, पलामू में भव्य जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड माटी कला बोर्ड के सदस्य अविनाश देव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने डॉ. रत्नप्पा कुम्हार के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. रत्नप्पा कुम्हार केवल किसी एक समाज के गौरव नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण की उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे, जिन्होंने आजाद भारत की बुनियाद रखने में अपना योगदान दिया। संसद के अभिलेखों में उनका नाम संविधान सभा के सदस्य के रूप में दर्ज है और संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्यों के संदर्भ में भी उनका उल्लेख मिलता है।

कुम्हार परिवार में जन्मे, इतिहास में दर्ज कराया नाम
डॉ. रत्नप्पा कुम्हार का जन्म 15 सितंबर 1909 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के इचलकरंजी में एक कुम्हार परिवार में हुआ था। साधारण सामाजिक पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने शिक्षा, सामाजिक चेतना, राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।
उनका जीवन इस बात का प्रमाण रहा कि प्रतिभा और संकल्प किसी जाति, वर्ग या आर्थिक परिस्थिति के मोहताज नहीं होते। उन्होंने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान, सहकारिता और सामाजिक समरसता के लिए लगातार काम किया। यही कारण रहा कि उनका व्यक्तित्व महाराष्ट्र की राजनीति से लेकर राष्ट्रीय जीवन तक प्रभावशाली बना।
वे संविधान सभा के सदस्य रहे और स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को आकार देने की ऐतिहासिक प्रक्रिया का हिस्सा बने। संविधान सभा ने लगभग तीन वर्षों तक गहन विचार-विमर्श के बाद संविधान निर्माण का कार्य पूरा किया था।

संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले महापुरुषों में शामिल
डॉ. रत्नप्पा कुम्हार का नाम उन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों में दर्ज है, जिन्होंने भारत के संविधान निर्माण की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाई। संसद के आधिकारिक अभिलेख में श्री रत्नप्पा भारमप्पा कुम्हार द्वारा संविधान पर हस्ताक्षर करने का उल्लेख है।
वक्ताओं ने कहा कि संविधान केवल एक किताब नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के अधिकार, सम्मान, समानता और लोकतांत्रिक भविष्य की आधारशिला है। इस आधारशिला को मजबूत करने वालों में डॉ. रत्नप्पा कुम्हार का योगदान आने वाली पीढ़ियों को बताया जाना चाहिए।
सहकारिता आंदोलन से समाज सेवा तक बनाई अलग पहचान
डॉ. रत्नप्पा कुम्हार ने सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए सहकारिता आंदोलन को महत्वपूर्ण माध्यम बनाया। उनके योगदान को भारत सरकार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया। 1985 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया और भारत सरकार की आधिकारिक अधिसूचना में उनके सम्मान का क्षेत्र “Co-operative Movement” दर्ज है।
उनका सार्वजनिक जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा। वे जनप्रतिनिधि के रूप में भी सक्रिय रहे और महाराष्ट्र के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि सत्ता और पद उनके लिए लक्ष्य नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम रहे।

अविनाश देव बोले : इतिहास के इस महान नायक को किताबों से बाहर नहीं रहने देंगे
मुख्य अतिथि अविनाश देव ने कहा कि डॉ. रत्नप्पा कुम्हार का जीवन आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि देश के बहुत से बच्चे और युवा ऐसे महान संविधान सभा सदस्यों के जीवन और योगदान से परिचित नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “डॉ. रत्नप्पा कुम्हार को केवल जयंती के दिन याद करना पर्याप्त नहीं है। उनके संघर्ष, विचार, सामाजिक दर्शन और राष्ट्र निर्माण में योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा। सरकार से हमारी मांग है कि डॉ. रत्नप्पा कुम्हार के जीवन और योगदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि देश का प्रत्येक बच्चा जाने कि भारत के संविधान निर्माण में किन-किन महापुरुषों ने अपना योगदान दिया था।”
अविनाश देव ने कहा कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर सहित संविधान सभा के सभी सदस्यों ने जिस लोकतांत्रिक भारत की नींव रखी, उसका लाभ आज प्रत्येक भारतीय को मिल रहा है। इसलिए संविधान निर्माण में योगदान देने वाले सभी महापुरुषों के संघर्ष और विचारों को जन-जन तक पहुंचाना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।
मेदिनीनगर में लगे डॉ. रत्नप्पा कुम्हार की आदमकद प्रतिमा
अविनाश देव ने मेदिनीनगर में पद्मश्री डॉ. रत्नप्पा कुम्हार की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि शहर में उनकी प्रतिमा स्थापित होने से आने वाली पीढ़ियां उनके व्यक्तित्व से परिचित होंगी और उनके कार्यों से प्रेरणा लेंगी।
उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे डॉ. रत्नप्पा कुम्हार के जीवन को केवल गौरव के रूप में न देखें, बल्कि उसे पढ़ें, समझें और नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि समाज को अपने ऐसे महापुरुषों के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा।

अच्छेलाल प्रजापति ने रखा जीवन-वृत्त, कहा—रत्नप्पा का जीवन संघर्ष और संकल्प की मिसाल
कार्यक्रम में अच्छेलाल प्रजापति ने डॉ. रत्नप्पा कुम्हार के जीवन-वृत्त पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उनके सामाजिक संघर्ष, राजनीतिक जीवन, सहकारिता आंदोलन तथा संविधान सभा में उनकी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि डॉ. रत्नप्पा कुम्हार का जीवन साधारण परिवार से उठकर असाधारण ऊंचाई हासिल करने की प्रेरक गाथा है।
उन्होंने कहा कि समाज को अपने महापुरुषों के इतिहास को संरक्षित करना होगा, क्योंकि जिस समाज को अपने इतिहास और संघर्ष के नायकों की जानकारी नहीं होती, वह अपने भविष्य की दिशा भी कमजोर कर देता है।

समाज की एकजुटता का दिखा संदेश
समारोह की अध्यक्षता जटाधारी गुरुजी,त्रिपुरारी प्रजापति ने की। आयोजन में संतोष गुरुजी, चंदन गुरुजी एवं शंकर प्रजापति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के अंत में चंदन प्रजापति, शिक्षक, गिरवर हाई स्कूल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर पर ललन प्रजापति, त्रिपुरारी प्रजापति, अमित प्रजापति, संतोष प्रजापति, राजू प्रजापति, गणेश प्रजापति, शंकर प्रजापति, अरविंद प्रजापति, सविता देवी, रविंद्र कुमार, धर्मेंद्र प्रजापति, yकामेश्वर प्रजापति, संजय प्रजापति, सत्य बहिनी, धनेश प्रजापति, प्रवेश प्रजापति, राकेश प्रजापति, संगीत प्रजापति, रवि कुमार, ईश्वरी प्रजापति, हरिनारायण प्रजापति, मुकेश प्रजापति, विधायक प्रत्याशी अमित कुमार पांकी से ईश्वरी प्रजापति अनिरुद्ध प्रजापति स्वर्गीय बजरंगी जी के बेटा छोटू प्रजापति,श्याम नारायण प्रजापति, धर्म प्रजापति, बीगन प्रजापति, जपला के शंकर प्रजापति सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
समारोह में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि डॉ. रत्नप्पा कुम्हार के विचारों, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में योगदान को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा तथा उनकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों से जोड़ा जाएगा।





