Tiger Jairam Mahto की बातों से बाग-बाग है झारखंड की जनता
Ranchi : किसी स्वतंत्र एजेंसी से अगर जांच कराया जाए या किसी ईमानदार संगठन के द्वारा यहां की जनता का नब्ज टटोला जाए तो यही निष्कर्ष निकलेगा कि झारखंड की 90 प्रतिशत जनता यहां की पुलिस के कारनामों से त्रस्त है। यह कटु सत्य है और इस सत्य से इनकार नहीं किया जा सकता। झारखंड में जो लूट मची है, क्या इस लूट में यहां की पुलिस सहभागी नहीं है ? झारखंड के जंगल और खनिजों का दिन-रात दोहन हो रहा है, क्या इस दोहन में यहां की पुलिस की सहभागिता नहीं है ? झारखंड के नदियों से दिन-रात बालू का अवैध उठाव हो रहा है, क्या बालू के अवैध उठाव
में यहां की पुलिस की सहभागिता नहीं है ? झारखंड के खनिज अवैध रूप से दिन-रात दूसरे राज्यों में जा रहा है, क्या इस लूट में यहां की पुलिस की सहभागिता नहीं है ?

बता दें कि झारखंड के कई ऐसे थाने हैं, जहां पोस्टिंग के लिए डाक बोला जाता है। झारखंड के रामगढ़ और धनबाद जिला तो इसका जीता-जागता उदाहरण है। झारखंड के साहिबगंज जिला में कोटालपोखर एक छोटा सा थाना है। इसी थाना क्षेत्र से होकर अवैध पत्थर लदे ट्रक बंगाल जाता है और लाखों-करोड़ों रुपए की अवैध वसूली होती है। कहने का मतलब साफ है, यहां की पुलिस के हाथ काली कमाई से रंगे हुए है।
झारखंड बने 26 वर्ष हो गए। इतने वर्षों में यहां की पुलिस के करगुजारियों को कोई सही ढंग से उठाया नहीं था। अब जबकि डुमरी के विधायक टाइगर जयराम महतो, यहां की पुलिस की नब्ज को पहचान लिए हैं और हमला बोल रहे हैं। यह बात इन लोगों को हजम नहीं हो रहा है। अपने काले कारनामों को छुपाने के लिए और पचाने के लिए यहां की पुलिस किसी भी हद तक जाने को तैयार है। जिसका टाइगर जयराम महतो जोरदार विरोध कर रहे हैं। इन्होंने एक नहीं कई कई वीडियो सोशल मीडिया में जारी किया है। इस वीडियो में उन्होंने जो बातें कही है, वह कहीं से भी गलत प्रतीत नहीं होता है।
टाइगर जयराम महतो लगातार यहां की पुलिस पर हमला बोल रहे हैं। इस हमले का यहां की जनता दिल खोलकर स्वागत कर रही है और बाग-बाग है। झारखंड का एक भी जनता जयराम महतो के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है। अगर अवैध उत्खनन और अवैध बालू उठाव को यहां की पुलिस संरक्षण नहीं देती, तो सचमुच टाइगर जयराम महतो का विरोध यहां की जनता करती। लेकिन अभी तक टाइगर के खिलाफ आवाज नहीं उठ रहा है। ऐसे में यह समझ लेना चाहिए कि सचमुच कहीं ना कहीं दाल में काला है। यह जान जाइए, कि भारत के लोकतंत्र में वही महान है, जिसके साथ जनता है।
जहां तक झारखंड के थानों की वस्तुस्थिति की बात है, तो इससे से हर कोई वाकिफ है। यहां के थानों में उसी का वैल्यू है, जो या तो दमदार हैं या मालदार। बाकी का कोई वैल्यू नहीं। इस मानसिकता को बदलना होगा। यह भी सत्य है कि इस मानसिकता को बदलना इतना आसान भी नहीं है। इसके लिए शासन तंत्र को कड़े कदम उठाने होंगे।




