
जुलाई में भी मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका
New Delhi : भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी की है कि इस वर्ष जुलाई में भी मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, जुलाई में होने वाली मानसूनी बारिश के लॉन्ग-पीरियड एवरेज के 94 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है।

जुलाई का महीना इसलिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि पूरे चार महीने के मानसून सीजन की सबसे ज्यादा बारिश इसी महीने होती है। देश के अधिकांश किसान इसी दौरान धान, कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख समर (खरीफ) फसलों की बुवाई करते हैं।मौसम विभाग ने जून में एलपीए के 92% से कम बारिश का अनुमान लगाया था, लेकिन स्थिति उससे भी कहीं अधिक खराब रही। जून में सामान्य से 39.8% कम बारिश दर्ज की गई, जिसने इसे 1901 के बाद से अब तक का पांचवां सबसे सूखा जून बना दिया। इस सुस्त शुरुआत के कारण किसान फसलों की बुवाई में काफी पिछड़ गए हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक, जून की सूखी मार के पीछे ‘अल नीनो’ का बड़ा हाथ है। प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह गर्म होने की यह प्रक्रिया (अल नीनो) आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकती है, जिससे मानसून और कमजोर पड़ सकता है। इतिहास गवाह है कि अल नीनो के सालों में भारत को गंभीर सूखे का सामना करना पड़ा है, जिससे फसलें बर्बाद हुईं और सरकार को अनाज के निर्यात पर पाबंदी लगानी पड़ी थी।हालांकि, इस संकट के बीच राहत की एक किरण भी है।
मुंबई स्थित एक ग्लोबल कमोडिटी ट्रेडिंग हाउस के डीलर का कहना है, अगर मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों में बारिश रफ्तार पकड़ती है, तो खेतों की मिट्टी में इतनी नमी आ जाएगी कि किसान खरीफ फसलों की बुवाई सुचारू रूप से शुरू कर सकेंगे।



