
बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था की बदहाली,पेपर लीक पर कांग्रेस ने जताई चिंता
Latehar : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सोनाल शांति ने देश में परीक्षाओं की बदहाली, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
लातेहार परिसदन में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश में लगभग 89 पेपर लीक के मामले सामने आए, जिसके कारण 48 बार परीक्षाएं दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। उन्होंने एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों में 15 राज्यों में 41 पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिससे 1.4 करोड़ से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ।
सोनाल शांति ने कहा कि ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में कड़े दंड के प्रावधान होने के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुक रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि केवल कानून बनाने से व्यवस्था में सुधार नहीं आता, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन की भी आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि प्रमुख परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं। नीट-यूजी 2024 में लगभग 24 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए, जिसका मामला सीबीआई जांच और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2024 का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिससे 48 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। वहीं, सीटेट 2021 में पेपर लीक के कारण 28 लाख से अधिक उम्मीदवार प्रभावित हुए तथा यूजीसी-नेट 2024 परीक्षा आयोजित होने के अगले ही दिन रद्द कर दी गई, जिससे करीब 11 लाख छात्र प्रभावित हुए।
बेरोजगारी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार के आधिकारिक आंकड़े ही उसकी कार्यप्रणाली की पोल खोलते हैं। 1 मार्च 2023 तक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 9,64,359 पद रिक्त थे, जबकि 1 जुलाई 2024 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 84,106 पद खाली पड़े थे।
रेलवे भर्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच 4.11 लाख नियुक्तियां हुई थीं, जबकि 2014 से 2024 के बीच यह संख्या केवल 5.02 लाख तक पहुंच सकी, जबकि नौकरी के लिए आवेदन करने वालों की संख्या करोड़ों में है।
उन्होंने कहा कि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर सामान्य आधार पर 10.2 प्रतिशत तथा साप्ताहिक आधार पर 13.8 प्रतिशत है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि उच्च शिक्षित स्नातक और स्नातकोत्तर युवा सबसे अधिक बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
सोनाल शांति ने कहा कि व्यवस्था की इस विफलता की सबसे बड़ी कीमत देश के छात्र चुका रहे हैं। वर्ष 2022 में देश में दर्ज कुल आत्महत्या मामलों में 7.6 प्रतिशत, यानी लगभग 13 हजार छात्र शामिल थे। सितंबर 2025 में जारी वर्ष 2023 की रिपोर्ट में यह संख्या अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि कोटा, त्रिशूर और चेन्नई जैसे प्रमुख कोचिंग केंद्रों में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं और इस दिशा में गंभीर पहल की आवश्यकता है।





