पुत्रों की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने किया जितिया पर्व
24 घंटे का निर्जला उपवास रखा,सूर्य को अर्द्ध देने के साथ व्रत संपन्न
Palamu : पलामू जिले में जितिया पर्व पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। माताओं ने अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए 24 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखा।पर्व के पहले दिन महिलाओं ने ‘नहाए-खाए’ की परंपरा पूरी की। इसमें मडुआ की रोटी, नोनी का साग और मछली या सतपुतिया की सब्जी खाई गई। इसके बाद मुख्य व्रत के दिन सुबह ‘ओठगन’ (सरगही) के साथ व्रत शुरू हुआ।

पूरे दिन माताओं ने बिना पानी पिए कड़ा उपवास रखा। शाम के समय महिलाएं घाटों, मंदिरों और घरों में इकट्ठा होकर जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनीं।पूजा स्थल पर कुशा (घास) से भगवान जीमूतवाहन की मूर्ति बनाई गई। उन्हें सरसों का तेल, खरी, मडुआ और तोरई के पत्ते चढ़ाए गए। माताओं ने भगवान जीमूतवाहन से अपने बच्चों की हर संकट से रक्षा करने की प्रार्थना की।मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका व्रत करने से संतान को लंबी उम्र की प्राप्ति होती है। साथ ही उनके कष्टों का निवारण होता है।
पंडित राजेंद्र मिश्र ने बताया कि पुराणों में आई कथा के अनुसार राजा जीमूतवाहन ने दुर्गा अष्टमी के दिन ही ग्रामवासियों को प्रतिदिन एक बच्चे को आहार बनाने वाले गरुड़ से मुक्ति दिलाई थी। उनके आग्रह पर ही गरुड़ ने अमृत कलश से अमृत छिड़ककर सभी मृत बच्चों को जिदा कर दिया था। तबसे जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन जीमूत वाहन की पूजा होती है।
हमीदगंज के पंडित मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि जीवित्पुत्रिका व्रत करने से संतान को लंबी उम्र की प्राप्ति होती है। संतान वियोग नहीं होता व सुख शांति आती है। वही रविवार को माताओं ने भगवान सूर्य को अर्द्ध देने के बाद व्रत का पारण किया।




