लाश सड़ने-गलने लगा, नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महामारी फैलने का खतरा
Kathmandu : नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में मारे गए लोगों और पशुओं के शव सड़ने-गलने से प्रभावित क्षेत्रों में महामारी और संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ में सैकड़ों लोग लापता हुए हैं, जिनमें से बहुत कम लोग जीवित मिले हैं, जबकि अधिकांश के शव अब तक नहीं मिले हैं।
बाढ़ में हजारों पशु बह गए या मारे गए हैं, लेकिन उनके शवों के प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि इससे महामारी का रूप भयावह हो सकता है। इसलिए समय रहते तैयारी और सावधानी जरूरी है।
इधर-उधर बिखरे शवों के कारण हैजा, दस्त, स्क्रब टाइफस, रोटावायरस, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और ई, लेप्टोस्पायरोसिस, डेंगू, मलेरिया, त्वचा संबंधी संक्रमण और श्वसन संक्रमण फैलने की आशंका को लेकर संक्रामक रोग विशेषज्ञ चिंतित हैं। वरिष्ठ संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. शेरबहादुर पुन ने चेतावनी दी कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता नहीं अपनाई गई तो सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।

उन्होंने कहा, “सिर्फ इंसान ही नहीं, हजारों की संख्या में पशु भी मारे गए हैं। अब धीरे-धीरे उनके सड़ने और गलने की स्थिति बनने लगी है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। अनावश्यक लोग भी वहां जाते दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोग तो केवल देखने के लिए जा रहे हैं। अगर किसी एक व्यक्ति को कोई संक्रामक रोग हो गया तो वह पूरे देश में फैल सकता है। बाढ़ का अनुमान नहीं था, लेकिन बीमारी के फैलने का अनुमान लगाया जा सकता है। सरकार और नागरिक समाज को समय रहते सतर्क होना चाहिए।”
फिलहाल बाढ़ प्रभावित लोग सामूहिक रूप से रह रहे हैं। उनका खान-पान और रहने की व्यवस्था एक ही जगह पर है। डॉ. पुन के मुताबिक, टेंट या खुले स्थानों में रहने के दौरान मच्छर और अन्य कीड़े लोगों को काट सकते हैं और इसके जरिए एक-दूसरे में संक्रमण फैल सकता है।
उन्होंने कहा, “विस्थापित लोगों के सामूहिक रूप से रहने वाले स्थानों पर अगर पेयजल और गैर-खाद्य सामग्री का वितरण व्यवस्थित तरीके से नहीं किया गया तो स्थिति बदतर हो सकती है। खास तौर पर पानी से होने वाले रोग, हवा से फैलने वाले संक्रमण और दस्त संबंधी बीमारियों के फैलने का खतरा है। स्क्रब टाइफस का जोखिम और भी ज्यादा है। ऐसे समय में कीटों से फैलने वाली बीमारियों का भी अत्यधिक खतरा होता है। इसलिए सरकार को उनके स्वस्थ खान-पान और सुरक्षित रहने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए।”
डॉ. पुन ने सुझाव दिया कि पानी को उबालकर या क्लोरीन का इस्तेमाल करने के बाद ही पीना चाहिए, नियमित रूप से साबुन-पानी से हाथ धोने चाहिए, अस्थायी शिविरों में शौचालय और कचरा प्रबंधन को प्रभावी बनाना चाहिए तथा बुखार, दस्त, उल्टी या त्वचा में संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य संस्थान पहुंचना चाहिए।
बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट में हजारों घरों और अन्य संरचनाओं को पूरी तरह तबाह कर दिया है। इन घरों में रहने वाले कई लोग लापता हैं और उनके पाले हुए पशु मारे गए हैं। बाढ़ में बहकर आए लोगों के शव धादिङ, गोरखा, तनहुँ, चितवन और नवलपरासी पूर्व तक मिले हैं। जहां सरकार के लिए इंसानों के शवों का प्रबंधन करना ही चुनौतीपूर्ण हो रहा है, वहीं मरे हुए पशुओं के शवों के प्रबंधन पर अभी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मृत पशुओं के सड़ने और उनसे जीवाणु फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।




