ढाई महीने का मासूम, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया ! आखिर इस बच्चे का कसूर क्या था : अविनाश देव
अविनाश देव ने कहा : कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिन्हें शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है। कुछ दृश्य ऐसे होते हैं, जिन्हें देखने के बाद इंसान की आंखें ही नहीं, उसकी आत्मा भी रो पड़ती है।
Palamu : झारखंड मुक्ति मोर्चा के युद्ध क्रिकेट अविनाश देव गुरुवार को पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत ओरनार गांव में दिवंगत श्रवण प्रजापति के बर्खी कर्म में शामिल होने पहुंचे। उन्होंने कहा कि 24 अक्टूबर को सरवन की अचानक हुई असामयिक मृत्यु ने पूरे परिवार को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी संभव नहीं।बताया गया कि श्रावण प्रजापति उस दिन सुबह लगभग 9 बजे खाना खाने के बाद बिल्कुल स्वस्थ और सामान्य थे। कुछ देर आराम करने के लिए गए और फिर ऐसी दुखद खबर आई कि परिवार की दुनिया ही उजड़ गई। घर में उस समय कोई मौजूद नहीं था। उनकी पत्नी मायके में थीं और परिवार के अन्य सदस्य खेती-बाड़ी के काम में इधर-उधर थे। आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ, यह आज भी परिवार के लिए एक अनसुलझा सवाल है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के यूथ ब्रिगेड अविनाश देव ने कहा कि आज उनके घर पहुंचकर बड़े भाई प्यारी प्रजापति से मिला। आंगन में उनकी विधवा मां से बातचीत की। परिवार की पीड़ा सुनी। एक ऐसी पारिवारिक त्रासदी के बारे में जाना, जिसमें तीन पीढ़ियों ने असमय मृत्यु का दर्द झेला है। इन घटनाओं को लेकर समाज में तरह-तरह की चर्चाएं और अंधविश्वास फैलाए जा रहे हैं। मेरा स्पष्ट मानना है कि बिना किसी प्रमाण के किसी घटना को भूत-प्रेत, डायन या अंधविश्वास से जोड़ना उचित नहीं है। हमें संवेदना, विवेक और वैज्ञानिक सोच के साथ परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जिस दृश्य ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया, वह था सरवन के महज ढाई महीने के मासूम बेटे को अपनी गोद में लेना।
अविनाश देव ने कहा कि मैं उस बच्चे को देर तक निहारता रहा। उसकी मासूम आंखों में अभी दुनिया को पहचानने की शुरुआत भी नहीं हुई है और नियति ने उसके सिर से पिता का साया छीन लिया। जिस उम्र में बच्चे को पिता की उंगली पकड़कर चलना सीखना चाहिए, उस उम्र में वह पिता के प्यार और दुलार से हमेशा के लिए वंचित हो गया।
उन्होंने कहा कि उसकी मां की उम्र भी महज 20-22 वर्ष के आसपास होगी। जिस उम्र में एक लड़की अपने नए जीवन के सपने बुनती है, उसी उम्र में उसे विधवा होने का असहनीय दुख झेलना पड़ रहा है।
अविनाश देव ने कहा कि उस मासूम को गोद में लेते ही मेरा अपना बचपन आंखों के सामने घूम गया। मुझे अपना वह समय याद आ गया, जब मेरे सिर से भी परिवार के बड़ों का साया उठ गया था। शायद इसी कारण उस बच्चे की पीड़ा को महसूस करते हुए मैं खुद को संभाल नहीं पा रहा था।अविनाश देव ने कहा कि मन में बार-बार एक ही सवाल उठ रहा था : आखिर इस ढाई महीने के मासूम का क्या कसूर था? उस मां का क्या दोष था, जिसके जीवन का सहारा इतनी जल्दी छिन गया?उन्होंने कहा कि आज मैंने परिवार के लोगों और वहां उपस्थित समाज के सैकड़ों रिश्तेदारों के बीच एक सवाल रखा : क्या हमारा समाज केवल किसी के सुख-दुख में शामिल होने, भोज खाने और रस्में निभाने तक सीमित रहेगा, या फिर किसी उजड़े हुए परिवार का सहारा भी बनेगा?आज जरूरत इस बात की है कि हम सब मिलकर श्रावण प्रजापति की विधवा पत्नी और उसके मासूम बच्चे के भविष्य की जिम्मेदारी उठाने के लिए आगे आएं। इस बच्चे की पढ़ाई, परवरिश, स्वास्थ्य और परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए समाज को ठोस पहल करनी होगी।इस अवसर पर मैंने परिवार के बड़े भाई प्यारी प्रजापति को अपनी ओर से यथासंभव आर्थिक सहयोग दिया और भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में मैं उनके परिवार के साथ खड़ा हूं। परिवार की अन्य घरेलू एवं सामाजिक समस्याओं को भी सुना। जरूरत पड़ने पर समाज के लोगों तथा शासन-प्रशासन के सहयोग से समाधान कराने का प्रयास करूंगा।

समाज के सभी प्रबुद्ध लोगों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और सक्षम व्यक्तियों से अविनाश देव ने किया आग्रह
मौके पर अविनाश देव ने कहा कि आइए, इस मासूम के भविष्य को अनाथ और असहाय मत होने दीजिए। इसकी मां को अकेला मत छोड़िए। किसी परिवार का दुख केवल उस परिवार का दुख नहीं होता, बल्कि पूरे समाज की मानवीय संवेदना की परीक्षा होती है।हमें इस बच्चे के लिए ऐसा वातावरण बनाना होगा कि बड़ा होकर जब वह अपने पिता के बारे में पूछे, तो उसकी मां की आंखों में केवल बेबसी के आंसू न हों, बल्कि गर्व से यह कहने का साहस हो कि तुम्हारे पिता के जाने के बाद पूरा समाज तुम्हारा परिवार बनकर खड़ा था।
याद रखिए, किसी के मरने के बाद उसके घर जाकर संवेदना व्यक्त करना इंसानियत है, लेकिन उसके पीछे छूट गए परिवार को संभालना उससे भी बड़ा धर्म है : अविनाश देव
अविनाश देव ने कहा कि आज उस मासूम की आंखों में मैंने अपना बचपन देखा और उसके भविष्य के लिए समाज से एक नई जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
ईश्वर दिवंगत श्रवण प्रजापति की आत्मा को शांति प्रदान करें और इस परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति दें।




