Vacancy के इंतजार में Student ! आखिर कब तक इंतजार की चक्की में पिसते रहेंगे झारखंड के पढ़ें-लिखे युवा ?
Ranchi : झारखंड जब से अलग राज्य हुआ है, तब से लेकर आज तक यहां के युवा इंतजार की चक्की में पीस रहे हैं। यहां के युवाओं को कभी भी ऐसा मौका नहीं मिला कि वे खुले हृदय से यहां के प्रतियोगी परीक्षाओं का सम्मान कर सकें। सभी परीक्षाएं न्यायालय के इर्द-गिर्द घूमता रहा। लंबे बरसों तक न्यायालय का चक्कर काटने के बाद अगर यहां के युवा वर्ग को नौकरी मिला भी, तो अंततः वह नौकरी भी भ्रष्टाचार और अनियमितता की भेंट चढ़ गया। इस बात को अभी के घटनाक्रम से समझा जा सकता है।

समय की जरूरत थी छात्र आंदोलन
रांची की सड़कों पर छात्रों द्वारा 26 दिन तक, जो आंदोलन किया गया, वह समय की जरूरत थी। यह आंदोलन यहां के प्रतियोगी परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमित के खिलाफ था। बात भी सही है, झारखंड लोक सेवा आयोग और जेएसएससी में भ्रष्टाचार और अनियमितता किस कदर था, यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। इस आंदोलन का असर यह हुआ कि झारखंड सरकार को भी मानना पड़ा कि यहां जितने भी नियुक्तियां हुई है सभी में भ्रष्टाचार और अनियमितता था। इसी को लेकर सरकार ने अधिकांश नियुक्तियों को रद्द कर दिया और कई नियुक्तियों को जांच के दायरे में डाल दिया, जो जरूरी भी था। रांची की सड़कों पर लंबे दिनों तक आंदोलन कर रहे छात्रों को सरकार का यह फरमान अच्छा लगा। यही कारण रहा कि छात्रों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया।
सफल अभ्यर्थियों को हटाया जाना, सरकार का साहसिक कदम
एक आंदोलन राजधानी रांची में अभी भी चल रहा है। झारखंड के विभिन्न कार्यालय में नौकरी कर रहे छात्रों को हटाने के बाद यह आंदोलन शुरू हुआ है। यह वैसा आंदोलन है, जिन्होंने काफी दिनों तक मेहनत किया, जेपीएससी और जेएसएससी के चक्की में पिसते रहे और कोर्ट का भी चक्कर मारते रहे। इतना करने के बाद इन्हें नौकरी मिली। कई महीनो तक इन लोगों ने नौकरी भी किया और अंतत सरकार ने मिनटों में इन्हें बेरोजगार कर दिया। अभी का आंदोलन इन्ही अभ्यर्थियों का है। इन लोग अपने मामले को लेकर पुनः हाई कोर्ट का रुख कर दिया है। इस मामले में भी सरकार के कदम का किसी भी कीमत पर अनुचित नहीं ठहराया जा सकता है। देर से ही सही, लेकिन सरकार ने जो कदम उठाया, वह काबिले तारीफ है। जेपीएससी जेएसएससी में गड़बड़ी से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकार दूसरे राज्यों के लोक सेवा आयोग का अनुसरण करे और ठोस निर्णय ले
बता दें कि देश का झारखंड ही वैसा राज्य है, जहां का लोक सेवा आयोग शुरू से ही विवादों में रहा है। सरकार को इस मामले में कड़े कदम उठाने होंगे। सरकार को चाहिए कि वह एक-दो नहीं बल्कि 8-10 राज्यों के लोक सेवा आयोग के कामकाज का गहन समीक्षा कर उसका अनुसरण करे। और अपने राज्य के लिए ठोस निर्णय ले। तब जाकर जेपीएससी में व्याप्त अनियमितता और भ्रष्टाचार को काम किया जा सकता है।




