
उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में दो आरोपितों की अग्रिम जमानत पर अब 8 जून को सुनवाई
Ranchi : झारखंड में चर्चित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में आरोपित सोनू शर्मा और मोनू कुमार की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को अदालत में सुनवाई हुई। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बहस की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जून की तिथि निर्धारित की है।
सोनू शर्मा और मोनू कुमार को प्रश्नपत्र हल कराने वाले गिरोह का सक्रिय सदस्य माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक दोनों की भूमिका भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने और पेपर सॉल्विंग नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों में रही है। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
इस बहुचर्चित मामले में अब तक बड़ी संख्या में आरोपितों को अदालत से राहत मिल चुकी है। न्यायालय द्वारा अब तक 161 आरोपितों को जमानत दी जा चुकी है, जबकि छह आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं। सोनू शर्मा और मोनू कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर अब 8 जून को सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि गत 11 अप्रैल को झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और संगठित नकल गिरोह के संचालन के आरोप में पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए 155 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में अधिकांश परीक्षार्थी शामिल थे। सभी आरोपितों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को सूचना मिली कि रांची जिले के तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित भवन में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हैं। सूचना के आधार पर गठित विशेष छापेमारी दल ने 11 अप्रैल की देर रात वहां छापा मारा। पुलिस टीम के पहुंचते ही मौके पर मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 166 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपितों में अंतरराज्यीय पेपर लीक और पेपर सॉल्वर गिरोह के कथित सरगना अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद भी शामिल थे। इसके अलावा सात महिला आरोपितों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था।
जांच में सामने आया कि गिरोह के एजेंटों ने अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले रड़गांव में ठहराया था, जहां उन्हें संभावित प्रश्नों के उत्तर याद कराए जा रहे थे। आरोप है कि गिरोह ने अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड अपने कब्जे में रख लिए थे ताकि पूरी प्रक्रिया गोपनीय बनी रहे। इसके बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से लगभग 10 लाख रुपये लेने का सौदा किया गया था।



