
छतरपुर में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के प्रताड़ना से तंग आकर लोग कर रहे हैं आत्महत्या, जेएमएम ने किया विरोध
Palamu : माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के प्रताड़ना से तंग आकर छतरपुर प्रखंड के मौनाहा गांव के शिवनाथ परहिया के आत्महत्या की सूचना पर झारखंड मुक्ति मोर्चा की केंद्रीय समिति सदस्य सह पलामू जिला प्रवक्ता चन्दन प्रकाश सिन्हा, छतरपुर प्रखंड अध्यक्ष रवींद्र राम एवं प्रखंड सचिव सनी कुमार पीड़ित परिवार से मिले और ढाढ़स बंधाया। इस टीम में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय समिति सदस्य सह पलामू जिला प्रवक्ता चन्दन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि एक दैनिक समाचार पत्र में शिवनाथ परहिया के द्वारा आत्महत्या की सूचना प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। प्रकाशित किए गए खबर में शिवनाथ परहिया द्वारा माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के कर्मियों द्वारा लगातार प्रताड़ित करने के कारण आत्महत्या करने की बात कही गई थी। जो बेहद ही अमानवीय एवं भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के खिलाफ है। उसकी पत्नी के द्वारा बताया गया कि समय पर किस्त नहीं देने के कारण फाइनेंस कर्मियों द्वारा गाली गलौज एवं दुर्व्यवहार किया जाता है तथा नाबालिक बच्चियों को उठाकर ले जाने की कोशिश की गई थी।
मानसिक रूप से परेशान होकर शिवनाथ परहिया ने आत्महत्या कर लिया। इस घटना के लिए स्थानीय प्रशासन भी जिम्मेवार है। आज से लगभग दो वर्ष पूर्व तेनुडिह गांव में भी माइक्रो फाइनेंस कर्मियों द्वारा घर से सामान लूट कर ले जाने एवं दुर्व्यवहार करने की घटना का शिकायत थाने में किया गया था। कुछ फाइनेंस कर्मियों को पकड़ कर थाने में भी जिम्मा दिया गया था। लेकिन तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के द्वारा पैसा लेकर मामले को रफा दफा कर दिया गया था। जिसके कारण फाइनेंस कर्मियों का हौसला बढ़ गया और खुलेआम उत्पात मचा रहे हैं।

ग्रामीणों का विश्वास प्रशासन से उतर गया, जिसके कारण वह अपने साथ हो रहे ज्यादतियों की शिकायत नहीं कर पा रहे हैं और आत्महत्या कर ले रहे हैं। दुर्भाग्य की बात है की माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्मियों द्वारा आत्महत्या के लिए खुलेआम उकसाया जाता है और पैसा जमा नहीं दिए जाने की स्थिति में लोगों को सरेआम कहा जाता है कि यदि पति-पत्नी में किसी की मौत हो जाती है तो उनका लोन माफ कर दिया जाएगा। जिसके कारण लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है। लोगों को लोन चुकाने से आसान मौत को गले लगाना लग रहा है। आत्महत्या को लोन चुकाने के एक तरीका में शामिल कर लिया गया है।
एक ओर जहां सरकार आदिम जनजातियों को संरक्षण दे रही है तो दूसरी ओर माइक्रो फाइनेंस कंपनी द्वारा इन्हें मौत को गले लगाकर लोन चुकाने की का आसान तरीका बताया जा रहा है।
इन सारे घटनाओं में छतरपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी आशीष कुमार साहू के भूमिका भी चिंताजनक है। उनके द्वारा लोगों द्वारा आवेदन मिलने के बाद कार्रवाई की बात कही गई है। जबकि यह मामला आदिम जनजाति का था और उन्हें खुद संज्ञान लेते हुए पूरे प्रशासनिक टीम के साथ गांव में कैंप कर परिस्थितियों को जानना तथा उसका निपटारा करना चाहिए था। कोई पदाधिकारी इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है।
माइक्रो फाइनेंस कंपनियां द्वारा सरकार के आदेश का धज्जियां उड़ाते हुए क्षेत्र को लूटने का काम किया जा रहा है। इन सारी बातों से संबंधित शिकायत झारखंड सरकार से की जाएगी एवं उच्च स्तरीय जांच कर कार्रवाई की मांग की जाएगी।




